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झारखंड स्थापना दिवस रजत जयंती पर राज्यपाल ने किया जनजातिय जतरा का आगाज

मंत्री योगेन्द्र प्रसाद, डीसी व् डीडीसी बोकारो भी हुए शामिल, जतरा में भी साथ चले

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। झारखंड स्थापना दिवस रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 14 नवंबर को बोकारो जिला के हद में पेटरवार पूरी तरह जनजातीय रंग में रंग गया। पारंपरिक परिधान और ढोल–नगाड़ों की थाप के बीच झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आयोजित भव्य जतरा का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर राज्यपाल गंगवार ने स्वयं जन समूह के साथ कदम मिलाते हुए इस सांस्कृतिक पदयात्रा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति – परंपरा के संरक्षण के लिए इस जतरा का आयोजन जरूरी था। उन्होंने जतरा को आगे के लिए विदा किया एवं शुभकामनाएं दी। मौके पर बोकारो जिला उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा, उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार सहित जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के अधिकारी भी जतरा में उपस्थित थे। सड़क के दोनों किनारों पर खड़े ग्रामीण रहिवासियों ने जनजातीय नृत्य, गीत और पारंपरिक स्वागत से वातावरण को उत्सवी बना दिया।

सूबे के पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेन्द्र प्रसाद भी जतरा में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। सरना धर्म स्थल से शुरू होकर जतरा प्रखंड परिसर तक पहुंची। इस यात्रा में जन जातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक शक्ति साफ दिखाई दी। मंत्री ने राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष को राज्य के लिए नया पड़ाव और नए संकल्पों का वर्ष बताते हुए सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि झारखंड अपनी सांस्कृतिक धरोहर और संघर्ष की विरासत के कारण अनूठा है।

मंत्री ने जतरा में शामिल महिलाओं – महिला पदाधिकारियों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आज की महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिका में आगे बढ़ रही हैं। वे अब अबला नहीं, बलवान हैं। कार्यक्रम में माननीय मंत्री ने यह घोषणा की कि पुनः सरकार आपके द्वार अभियान शुरू किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर रहिवासियों की समस्याएं स्थल पर ही समाधान करेगा।

जतरा के समापन पर बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि झारखंड की आत्मा उसकी संस्कृति और परंपरा में बसती है। उन्होंने कहा कि हम अपनी जड़ों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। विकास को बरगद की तरह फैलाना है, ताकि हर नागरिक उसकी छाया में सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें। उन्होंने सभी को जोहार झारखंड कहा। जन जातीय महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की पारंपरिक सहभागिता के कारण जतरा पेटरवार के लिए बड़े सांस्कृतिक महोत्सव का रूप लेता दिखा। प्रशासनिक तैयारियों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से यह आयोजन सफल और आकर्षक रहा।

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