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कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने कारो नदी में लगाई आस्था की डुबकी

कार्तिक माह में दान-पुण्य व् पूजा करने से जीवन में खुशियों का वास-अन्तर्यामी महाकुड

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर 5 नवंबर को तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में स्थित कारो नदी के तट पर उमड़ पड़ी। आस्था और श्रद्धा का अनुपम दृश्य देखने को मिला जब सुबह 3 बजे से ही जिला के हद में गुवा बाजार स्थित कारो नदी में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचने लगे।

इस अवसर पर महिलाएं, पुरुष, बच्चे सभी पारंपरिक वेशभूषा में भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करते नजर आए। श्रद्धालुओं ने कागज और केले के छिलके से बनी छोटी नावों में दीप जलाकर नदी में प्रवाहित किया और अपने परिवार, समाज एवं देश की खुशहाली की कामना की। डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु कुसुम घाट स्थित शिव मंदिर पहुंचे, जहां सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर में भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालु कतारबद्ध होकर पूजा-अर्चना करते नजर आए।

कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर भक्तों ने भगवान शिव को दूध, बेलपत्र और गंगाजल अर्पित कर मंगल कामना की। पूरा वातावरण हर हर महादेव और जय श्रीहरि के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ महामंत्री सह समाजसेवी अन्तर्यामी महाकुड ने कहा कि विष्णु पुराण के अनुसार कार्तिक माह में श्रीहरि विष्णु योग निद्रा से जागते हैं। इस दौरान जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि की पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस माह में दान-पुण्य और पूजा-अर्चना करने से जीवन में खुशियों का वास होता है।

भारी भीड़ को लेकर स्थानीय स्वयं सेवकों ने व्यवस्था संभाली। वहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कारो नदी तट पर दीपों की रौशनी और श्रद्धा का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। कार्तिक पूर्णिमा के इस पावन स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं ने आस्था और अध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

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