आगामी 5 नवंबर को सामा-चकेवा का समापन व् 8-9 को विद्यापति स्मृति पर्व
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। धान… धान… छै, भैया कोठी धान छै, चुगिला कोठी भुस्सा छै, भैया मुख पान छै… जैसे मैथिली गीतों की गूंज से इन दिनों बोकारो के मिथिलांचल के रहिवासियों के घर-आंगन महक उठे हैं।
भाई-बहन के स्नेह और पति-पत्नी के स्वधर्म से जुड़ा मिथिलाँचल का लोकपर्व सामा-चकेवा बोकारो जिले में पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मैथिली भाषियों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद बोकारो द्वारा इस पर्व का भव्य समापन कार्यक्रम आगामी 5 नवंबर की शाम 6:30 बजे से सेक्टर चार ई स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित होगा।
परिषद के महासचिव नीरज चौधरी ने 2 नवंबर को एक भेंट में बताया कि संस्था मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर सक्रिय है। वहीं सांस्कृतिक निदेशक अरुण पाठक ने कहा कि आगामी 5 नवंबर को पारंपरिक गीतों के बीच सामा-चकेवा की विदाई होगी।
उन्होंने बताया कि सदियों पुरानी इस परंपरा में झूठी शिकायत करने वाले चुगला का मुंह जलाकर सत्य की विजय का प्रतीकात्मक संदेश दिया जाता है। मिट्टी की मूर्तियों से सजे डाले, गीत-नाद और पारिवारिक सौहार्द इस पर्व की आत्मा हैं।बताया कि इसके बाद परिषद द्वारा 58वां दो दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह आगामी 8 व् 9 नवंबर को इसी परिसर में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रसिद्ध मैथिली गायिका प्रिया मल्लिक, गायक माधव राय और मंच संचालक राजीव झा सहित कई कलाकार प्रस्तुति देंगे। दूसरे दिन बड्ड मुश्किल छै नाटक का मंचन होगा। परिषद ने सभी मैथिली प्रेमियों से इन आयोजनों में भाग लेने की अपील की है।
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