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मंदिर एवं घरों में देवउठनी एकादशी पर महिलाओं द्वारा तुलसी विवाह कार्यक्रम

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में पेटरवार में तुलसी विवाह पर्व देवउठनी एकादशी एक नवंबर को पूरे उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। गन्ने के मंडप तले शालिग्राम-तुलसी को चुनरी से सजाकर पूजा अर्चना के साथ विधि विधान से विवाह किया गया। तुलसी विवाह के बाद प्रसाद का भी वितरित किया गया।

इस अवसर पर महिलाओं ने मंदिर एवं घरों में भी तुलसी माता की पूजा की और तुलसी माता की फेरी लगाई। इसके बाद पूजा अर्चना कर तुलसी माता की आरती उतार कर महिलाओं ने तुलसी माता का कथा का श्रवण की।

ऐसी मान्यता है कि तुलसी विवाह करवाने से भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। देवउठनी पर्व के बाद वैवाहिक आयोजन सहित अन्य मांगलिक अनुष्ठान पूजा की शुरुआत होता है। धार्मिक परंपरा के साथ तुलसी व शालिग्राम विवाह देवउठनी में कराया जाता है। रहिवासी अपने घरों के द्वार पर रंगोली की कलाकृति बनाकर सजाते हैं।

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जगते हैं। चार माह की इस अवधि को चतुर्मास कहते हैं।देवउठनी एकादशी के दिन चतुर्मास का अंत हो जाता है और हिंदू धर्म में शादी-विवाह शुरू हो जाते हैं। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है।

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