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हेमंत सरकार करवा रही लाठीचार्ज और सांपनाथ भाजपा बहा रही आंसू-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार एक ओर पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) में मुलवासियों पर लाठीचार्ज करवा रही है वहीं दूसरी ओर सांपनाथ भाजपा अब घड़ियाली आंसू बहा रही है। दोनों पार्टियाँ नागनाथ एवं सांपनाथ और आदिवासी मूलवासी विरोधी है। झारखंडी समाज इन पार्टियों से दुरी बनाये।

बीते 27 अक्टूबर की रात चाईबासा में शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस की बर्बर लाठीचार्ज, जहरीली आंसू गैस और महिलाओं समेत आदिवासियों को जेल भेजना हेमंत सरकार का खूनी, फासीवादी चेहरा है। मौत बांटती एनएच-220 व् बाईपास पर ट्रक माफिया की मनमानी रोकने की मांग पर जनता की आवाज को कुचलना लोकतंत्र का बलात्कार है। नागनाथ हेमंत सरकार और सांपनाथ भाजपा दोनों आदिवासी मूलवासी समाज विरोधी पार्टियाँ है।

उपरोक्त बाते 29 अक्टूबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने पुलिस लाठीचार्ज एवं आंसू गैस छोड़े जाने पर अपनी प्रतिक्रिया में कही। उन्होंने कहा कि उक्त घटना के विरोध में भाजपा आज चाईबासा बंद बुलाकर पुतला दहन कर रही है, लेकिन भाजपा अपने शासनकाल में खुद ही आदिवासियों का खून बहाया था। उन्होंने कहा कि रघुवर दास सरकार (वर्ष 2014-19) पत्थलगड़ी आंदोलन पर सीधे गोली चलवाई थी। जिसमें झारखंड के खूटी, घाटशिला व् सरायकेला में दर्जनों आदिवासी शहीद हो गये तथा सैकड़ों घायल हो गये थे।

बताया कि पत्थलगड़ी गोलीकांड 2018 में पुलिस ने बिना चेतावनी सीधे फायरिंग की, जिसमें मासूम बच्चे तक मारे गए।
नायक ने कहा कि भाजपा सरकार के शासनकल में लाठीचार्ज का काला इतिहास है। आदिवासी जल-जंगल-जमीन बचाओ आंदोलनों पर हर जिले में खूनी लाठियां बरसाईं गयी। आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार कर धरना देती मां-बहनों को घसीटा, पीटा, जेल भरा गया था। आज वही भाजपा महिला सशक्तिकरण और लाठीचार्ज पर ढोंग रच रही है।

नायक ने कहा कि हेमंत की नागनाथ सरकार ने कल आदिवासी समाज का दमन किया और भाजपा रूपी सांपनाथ ने आंसू बहाया। दोनों एक ही थाली के चट्टे-बट्टे है। भाजपा अब चंपाई सोरेन जैसे अपने आदिवासी चेहरे को आगे कर राजनीतिक रोटियां सेंक रही है, लेकिन जनता भूल नहीं सकती कि सत्ता में रहते भाजपा ने कितने बार लाठीचार्ज एवं गोलीकांड करा चुकी है, जिसे जनता भूली नही है। कहा में भाजपा भी कभी आदिवासी विरोधी तत्वों की गोद में बैठी थी, आज विपक्ष में रहकर घड़ियाली आंसू बहाने का ढोंग कर रही है।

हमारी मांगें 24 घंटे में सभी गिरफ्तार आदिवासियों (महिलाएं सहित) की बिना शर्त रिहाई, लाठीचार्ज के खूनी पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा तथा तत्काल निलंबन। कल से दिन में भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध अन्यथा सड़कें हमेशा के लिए बंद। 15 दिन में हर दुर्घटना स्थल पर स्पीड ब्रेकर, सीसीटीवी, पैदल पथ। सीएम-डीजीपी का सार्वजनिक माफी नामा, नहीं तो कुर्सी छोड़ो। आदिवासी दमन की एसआईटी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो।

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