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हर परिवार को ऑन तथा ऑफ फार्मिंग से जोड़ना प्रशासन का लक्ष्य-उपायुक्त

उपायुक्त ने की विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में 8 अक्टूबर को बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, उद्यान आदि से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक की।

समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने कहा कि जिले के प्रत्येक परिवार को ऑन फार्मिंग’ (कृषि आधारित गतिविधियां) और ‘ऑफ फार्मिंग’ (कृषि के बाहर की आजीविका गतिविधियां) से जोड़ना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक परिवार को उसकी भूमि, संसाधन और कौशल के अनुसार किसी न किसी आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाए। इससे न केवल परिवारों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि बोकारो को एक समग्र आजीविका मॉडल जिला के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

उपायुक्त झा ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि जिले में लाभुकों का सामाजिक–आर्थिक सर्वेक्षण कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन–कौन सी परिवारिक इकाइयां किस प्रकार की आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हैं, और किन परिवारों को विशेष सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से एकल महिलाएं, विधवा, परित्यक्ता या आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी महिला बोकारो में बेसहारा नहीं रहेगी, प्रशासन उनके साथ है।

समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के लिए सभी विभागों को समन्वित और समेकित योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर विभाग अलग–अलग योजनाएं चलाते हैं, जिससे लाभुकों तक प्रभावी परिणाम नहीं पहुंचते। इसलिए अब एकीकृत आजीविका योजना बनाकर सभी विभाग मिलकर कार्य करेंगे। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी संबंधित विभागों के वरीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लाभुक चयन, प्रशिक्षण, संसाधन उपलब्धता, विपणन, उत्पाद ब्रांडिंग और वित्तीय सहायता तक की पूरी श्रृंखला को एक छत के नीचे लाने की व्यवस्था करें।

बैठक में उपायुक्त ने कहा कि इस बार जिला प्रशासन नवंबर माह में धान कटनी महोत्सव का आयोजन करेगा। उन्होंने सहकारिता विभाग को इसका नोडल विभाग बताते हुए महोत्सव का विस्तृत प्रारूप तैयार करने तथा महोत्सव की ब्रांडिंग पूरे जिले में करने को कहा। हालांकि, इस महोत्सव में सभी लाइन विभाग एक टीम के तरह काम करेंगे। यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और समृद्धि का उत्सव है। उन्होंने जिला सहकारिता पदाधिकारी को धान क्रय करने के लिए चिन्हित पैक्स की बैठक बुलाकर उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा। कहा कि इस बार पैक्सों को बैंक गरांटी देना है, साथ ही किसानों को धान क्रय के समय ही सरकार ने पूरी राशि भुगतान करने का निर्णय लिया है। पूरी प्रक्रिया से किसानों को अवगत कराना आवश्यक है, ताकि महोत्सव जन आंदोलन का रूप ले सके।

बैठक में उपायुक्त ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस क्रम में उन्होंने निर्देशित किया कि विभाग प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पंप अधिष्ठापन कार्य में संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर कार्य में तेजी लाएं। सभी एजेंसियों के साथ ऑनलाइन बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। झारखंड मिलेट मिशन के तहत फसल सत्यापन कार्य में तेजी लाने, सभी एटीएम/बीटीएम एवं कृषक मित्र को इसे सुनिश्चित करने को कहा। कृषक समृद्धि योजना के तहत जिला के हद में चंदनकियारी प्रखंड में सोलर पंप सिस्टम का वितरण कम होने पर उपायुक्त ने असंतोष जताया।

उन्होंने निर्देश दिया कि शीघ्र सोलर पंप का वितरण किया जाए और संबंधित कंपनी को कार्यादेश तत्काल निर्गत करें। विभाग द्वारा सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के अंतर्गत लक्ष्य अनुरूप शत प्रतिशत मृदा नमूना संग्रहण सुनिश्चित करने तथा शत प्रतिशत सॉयल हेल्थ कार्ड वितरण करें। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फसल चयन एवं उर्वरक प्रबंधन की जानकारी देकर उत्पादन में वृद्धि लाने की दिशा में कार्य करने की बात कही। वहीं, डिजिटल क्रॉप सर्वे की धीमी प्रगति पर भी असंतोष जताते हुए जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक वीएलई को सर्वेयर के रूप में जोड़ें, ताकि आगामी 15 अक्टूबर की निर्धारित समय-सीमा से पूर्व यह कार्य पूर्ण किया जा सके। उन्होंने कहा कि कृषक पाठशाला के माध्यम से फसल बीमा, कृषि यंत्रीकरण एवं किसान प्रशिक्षण शिविरों को भी नियमित रूप से संचालित किया जाए, ताकि किसानों के बीच तकनीकी जागरूकता बढ़े।

मत्स्य विभाग तालाबों की मैपिंग और केज फिशिंग को दें बढ़ावा

समीक्षा के क्रम में उपायुक्त द्वारा मत्स्य विभाग को निर्देश दिया गया कि जिले के सभी सरकारी तथा निजी तालाबों की भौगोलिक मैपिंग एक सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन एवं केज फिशिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से युवाओं को जोड़ना आवश्यक है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता दोनों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिन तालाबों का उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें मत्स्य पालन हेतु चिन्हित कर योजनाबद्ध रूप से मछुआरा समूह को सौंपें।

बैठक में उपायुक्त ने पशुपालन विभाग को निर्देश दिया कि जिले में गोटरी बैंक स्थापित करने की दिशा में त्वरित कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि 10 से 20 किसानों का समूह (क्लस्टर) बनाकर फेडरेशन का गठन किया जाए, जिससे सामूहिक उद्यम को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने बताया कि नाबार्ड विभिन्न बैंकों से वित्तीय सहयोग प्राप्त कर इस योजना को महिला उद्यमिता से जोड़ा जाएगा। कहा कि लक्ष्य है कि जिले की 10 हजार से अधिक महिलाओं को पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, पोल्ट्री एवं गोटरी के माध्यम से उद्यमी बनाया जाए।

उपायुक्त झा ने कहा कि कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियां बोकारो के विकास की आधारशिला हैं। यदि सभी विभाग मिलकर लक्ष्य आधारित कार्य करें तो बोकारो राज्य का कृषि, मत्स्य और पशुपालन मॉडल जिला बन सकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि, हर योजना का लाभ तभी दिखेगा जब हम परिवार को आत्मनिर्भर बना पाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य केवल योजना लागू करना नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज को सशक्त बनाना है।

बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष सह डीडीएम नाबार्ड सुनीता देवी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी रितुराज, जिला कृषि पदाधिकारी मो. शाहीद, जिला मत्स्य पदाधिकारी नीलम एक्का, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ असीम कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, जिला गव्य पदाधिकारी त्रीदेव मंडल समेत संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।

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