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सेंचुरी निर्माण विचारों को सरकार को अवगत कराने के लिए आम सभा

रोवाम में तीन घंटे तक बनी रही 2500 ग्रामीणों की उपस्थिति

दर्जनों ग्रामीणों ने तीर धनुष उठाकर किया सेन्चुरी निर्माण का विरोध

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में सारंडा वन क्षेत्र के 576 वर्ग मीटर को सेंकचुरी सुनवाई किए जाने के विरोध में झारखंड सरकार द्वारा रोवांम फुटबॉल मैदान में बीते दिनों आम सभा का आयोजन किया गया। आमसभा में सारंडा के विभिन्न क्षेत्रो के गांवों के प्रतिनिधियों ने अपने अपने विचार व्यक्त की।

सभा की शुरुआत सारंडा डीएफओ अभिरूप सिन्हा ने संक्षिप्त संबोधन से की, जिसमें उन्होंने आहूत कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट किया। मौके पर मानकी सारंडा पीढ लगुड़ा देवगम ने कहा कि सेंचुरी बने तो पहले ग्रामीणों का संरक्षण और विकास सुनिश्चित हो। कहा कि रोवाम के खदानें जंगल और नदी-नाले बर्बाद कर रही हैं, पर रोजगार नहीं दे रही है। रामो सिद्धू. ने कहा कि गरीब रहिवासी कहाँ जाएगा। उन्होने सेन्चुरी बनने का विरोध किया। साथ ही कहा कि आदिवासी ही नदी एवं नाला की रक्षा करने वाले है।

पंचायत समिति सदस्य रामेश्वर चांपिया ने कहा कि ग्रामसभा की अनुमति के बिना सेंचुरी का कोई औचित्य नहीं। अमर सिंह सिद्धू ने कहा कि सारंडा के आदिवासी परंपरा पूरी तरह नष्ट हो जाएगा, यदि सेंकचुरी घोषित हो जाता है तो आदिवासी समुदाय पर प्रभाव पड़ेगा। रोवाम के मुंडा बुद्धराम सिद्धू, मदन सिद्धू व जयराम कुरकुद ने कहा कि ग्राम सभा करनी चाहिए थी तब यह निर्णय लेना चाहिए था कि सेंचुरी बनेगी या नहीं। उन्होंने सेल के अतिरिक्त अन्य आस पास के चार माइंसों की व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि रोजगार से ग्रामीणों को वंचित रखा गया है। बुन्डू रहिवासी कृष्णा टोपनों ने कहा कि आने वाली पीढी के लिए सेंचुरी समस्या उत्पन्न करेगी, अतः ग्रामीण विरोध में एकजुट हैं।

आमसभा में घाटकुरी के मानकी सुरेश चाँपिया ने सेन्चुरी बनाने के विरोध में सड़क जाम करने की घोषणा कर सेन्चुरी लगाना बन्द करने की आवाज लगा मंच से सभी आदिवासी ग्रामीणों को तीर धनुष उठा नारे बाजी लगवा दी। पंचायत समिति सदस्य महिला तारासोय उपेक्षित ग्रामीणों की समस्या से रहिवासियों को रु-ब-रु कराते हुए सारंड के आम जनता की सड़क की समस्या पर टिप्पणी की। कहा में ग्रामीण रहिवासी बाहर जा रहे है। वन विभाग क्षेत्र के विकास को नरअंदाज कर रही है। सेल मेडिकल कैंप लगाने के नाम पर रहिवासियों को धोखा दे रही है। उन्होंने कहा कि डीएवी स्कूल की माँग ग्रामीण क्षेत्र में की गई थी, लेकिन वर्तमान में डीएवी चिड़िया में स्कूल का संचालन हो रहा है। इससे क्षेत्रीय ग्रामीण को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीण बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।

कहा कि एक परिवार में एक सदस्य को नियुक्ति मिलनी चाहिए। युवा आईटीआई की शिक्षा प्राप्त कर बेकार हो बेरोजगारी का दंश झेल रहे है। सलाई रहिवासी मोताय सिद्धू ने सकारात्मक ढंग से विरोध जताया तथा न्यायपालिका, कार्यपालिका तथा विधायिका पर विश्वास करने की गुहार लगाई। टोंटों के ग्रामीण बुध राम लागुरी ने झारखंड सरकार को आड़े हाथों ले छतीसगढ की तरह झारखंड राज्य को उजाड़ने की बात कही। उन्होंने सर्वेच्च न्यायालय को श्रेष्ठ मानने के बावजूद भी सेन्चुरी योजना को बन्द करने पर बात रखी। उन्होंने कहा कि यह सुप्रिम कोर्ट का मामला है।

पूर्व के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को आधार बता उन्होंने कहा कि रहिवासियों को उधेड़बुन में रख सारदा लाईम स्टोन प्लांट खोला गया अतः आज की स्थिति की जाँच की जानी चाहिए। सारंडा के नुकसान पर कोल विद्रोह की बात उन्होंने कहा।
गांगदा के वार्ड सदस्य गुलयान चांपिया, पूर्व मुखिया गुवा कपिलेश्वर दोंगो, गांगदा पंचायत के उप मुखिया सादो चाँपिया, बुन्डू के ग्रामीण राजेश पूर्ति, जोजोगुटू के ग्रामीण सुधीर कंडूलना क्षेत्री, ग्रामीण गेबरल चाँपिया ने भी विचार रखे।

पूर्व मुखिया कपिलेश्वर दोंगो ने कहा कि सेंचुरी का आना इस बात का संकेत है कि आदिवासी संस्कृति को नष्ट करने की योजना बनाई जा रही है। सभा की अध्यक्षता समिति के सदस्य मंत्री दीपक बिरुवा ने करते हुए कहा कि ग्रामीणों के भावनाओं को सर्वेच्च न्यायालय तक पहुंचाएंगे। सर्वेच्च न्यायालय के दिशा निर्देशन पर सारंडा में वाडल्ड लाइफ सेन्चुरी बनाने का निर्णय लिया गया। कहा कि आम ग्रामीणों की विरासत, साँस्कृतिक एवं जीवकोपार्जन विधि तथा भावनाओं को सर्वेच्च न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।

मंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम गठित करने का उद्देश्य बिल्कुल साफ है कि झारखंड सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का आदर, सम्मान और उसकी मर्यादा की रक्षा बेहतर तरीके से करना जानती है। सभा में सेन्चुरी निर्माण की सदस्यता की पूरी कार्यवाही अन्य मंत्रियों की अनुपस्थिति में सदस्य सह मंत्री दीपक बिरुवा को ही करना पड़ा। मौसम की बेरुखी के कारण अन्य सदस्य सह मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री चमरा लिंडा, मंत्री संजय प्रसाद यादव और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह नही आ सके।

सारी तैयारी व प्रशासनिक हेली पैड पर हेलिकाँपटर उतारने की व्यवस्था शोभा की वस्तु बन कर रह गयी। कार्यक्रम में मंचासीन सांसद जोबा माझी, विधायक सोनाराम सिंकू, विधायक जगत माझी, जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सोरेन, उपायुक्त चंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेणु, सारंडा डीएफओ अभिरूप सिन्हा, पीएचसी मनोहरपुर के चिकित्सक डॉ अनील कुमार, आईसीडीए निदेशक जयदीप तिग्गा, अनुमण्डल पदाधिकारी जगन्नाथपुर महेन्द्र छोटन उरांव, एपीआरओ चाईबासा सचिन कुमार, एसडीपीओ किरीबुरु अजय करकेट्टा के अतिरिक्त एसडीपीओ मनोहरपुर एवं जगन्नाथपुर, गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार व अन्य कई थानों के पुलिस कर्मी उपस्थित थे।

वहीं सभा में झामुमों प्रतिनिधि में अभिषेक सिंकू, विधायक प्रतिनिधि जीतेन महतो, आनन्द सिंह, मो. तबारक, जिलाध्यक्ष चन्द्रशेखर दास, टीएससी सदस्य जेसाय मार्डी, समाजसेवी सोनू सिरका, सोनाराम देवगम, झामुमो नेता विश्वनाथ बाड़ा, बंदना उरांव, प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा चरण देवगम, मनोज लागुरी, विपीन पूर्ति, कमरान रजा, बामिया पूर्ति, मंगल कुम्हार व अन्य कई उपस्थित थे।

मंच संचालन बीडीओं खूँटपानी धनंजय पाठक द्वारा की गई। वहीं सभा का यह निष्कर्ष निकला कि फैसला जनता के हाथ में सारंडा के घने जंगलों में आज विकास बनाम अधिकार की जंग छिड़ी हुई है। जहां एक ओर वन्य जीवों और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर आदिवासियों की आजीविका और परंपरागत अधिकार भी उतने ही अहम हैं। झारखंड सरकार की विधानसभा स्तरीय समिति ने स्पष्ट किया कि जनता की राय सर्वोपरि है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और सर्वोच्च न्यायालय मिलकर किस तरह इस संतुलन को साधते हैं।

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