हिंदी कविता को सहजता से न लें, भाषा व्याकरण पर दें ध्यान-भगवती प्रसाद द्विवेदी
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बिहार के सुप्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने साहित्य परिषद सोनपुर द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में कहा कि हिन्दी कविता को सहजता से नहीं लें। इसकी भाषा और व्याकरण की शुद्धता पर ध्यान देने की जरूरत है। कहा कि हम हिंदी के प्रति सजग हैं, यहां तक तो ठीक है परंतु तुकबंदी के चक्कर में भाषा और व्याकरण का मान भंग न हो, इसका ख्याल रहना चाहिए।
कविवर द्विवेदी सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ सभागार में 21 सितंबर को आभा साहित्य परिषद सोनपुर के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी, भगवती प्रसाद द्विवेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वनाथ सिंह सहित सभी आगत अतिथियों का अंग -वस्त्र से सम्मानित किया गया।
सुप्रसिद्ध कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी ने इस मौके पर भाषा बहता नीर हमारी हिन्दी है, स्वाभिमान की प्राचीर हमारी हिन्दी है काव्य पाठ से हिंदी की गौरव – गरिमा का गान किया। कवियित्री साधना कृष्ण ने गीत विधा में समर्थ सलिला गंगा जैसी लगती अपनी हिंदी है से हिंदी का गौरव गान किया।
कवि सम्मेलन में सर्वप्रथम वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के कवि अखौरी चन्द्रशेखर ने सरस्वती वंदना वीणा वादिनी वर दे मंगलाचरण से कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने सब लोग यहां सुख खोज रहे हैं, बोलो फिर दु:ख का क्या होगा, जब दर्द ही न हो दिल में कहो गजलों गीतों का क्या होगा? प्रस्तुत कर कविता के मर्म को समझाया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता आभा परिषद के अध्यक्ष एवं गीतकार व कवि सीताराम सिंह कर रहे थे, जबकि संचालन हाजीपुर के कवि संजय विजित्वर ने किया।

बज्जिका के कवि वैशाली जिला के हद में घटारो रहिवासी मणिभूषण सिंह ‘अकेला’ ने हिंदी रचना चुनावी मौसम के हथकंडे हास्य काव्य पाठ कर दर्शकों को वर्तमान परिस्थिति से अवगत कराया। डॉ के. कृष्ण ने ये जीवन की कहानी है, जो सबको ही निभानी है। जीवन बहता पानी है, जो रुकने की न ठानी है। हाजीपुर के कवि आशुतोष कुमार सिंह ने चलो देखते आगे – आगे इस दुनिया में क्या- क्या होता है, हमने फूल गुलाब के बोए थे पर पौधा कांटों का होता है। मिथिलेश श्रीवास्तव ने मुक्तक आदमी जब भी इंसान हो जायेगा, जिंदगी जीना आसान हो जायेगा।
प्रधानाचार्य रामदेव मंडल ने संविधान के प्रति अपनी रचना हाथ जोड़कर विनती करूं, कवि मधुमंगल सिंह ‘मधु’ ने कहा कि अतरी से है भूख का रिश्ता, चांद सिंह ने तारों को तमन्ना थी कि कोई उस पर भी रहता, हाजीपुर की शिक्षिका रीना कुमारी ने अपनी कविता पुस्तक प्रेम का पाठ किया। कवि सम्मेलन में बिहार की राजधानी पटना के कुंदन सिंह क्रांति ने नारी शक्ति के प्रति समर्पित कविता बिन सवाल किए जो मां – पिता की सुनें तथा बेटियां जो तथा पटना के कवि शशि भूषण सिंह ने मां तुझे क्या बोलूं मैं मातृ शक्ति को समर्पित कविता तथा हाजीपुर के डॉ नंदेश्वर सिंह ने हिंदी की व्यथा पर जय हिंदी दिवस”पर व्यंग्यात्मक लहजे में लोगों के दिल में है कुछ और जुंबा पर कुछ और है, हर कोई यहां जमा है पर हकीकत कुछ और है पाठ किया।
इस अवसर पर लोक गायक पुष्कर सिंह ने पतझड़ का मौसम चल रहा था एवं वो पूछा करती थी नशा करते हो क्या? तथा गीत खूनवा पसीनवा शहरिया में भैया कौड़ी के भाव में बिगाइल बा गाकर दर्शकों का वास्तविकता की ओर ध्यान खींचा। संचालन कर रहे संजय विजित्वर ने जय हो जय हो हिंदी शीर्षक का पाठ हिंद की बिंदी है हिंदी, एक साथ हम मिलकर बोलें लहू हिन्द का हिंदी जय हो, जय हो हिंदी।
करणजीत सिंह सांवरिया ने जब थक हार कर अपने घर को आते हैं, सुमित सिंह ने कालम कालम महाकालम त्रिपुरारी, सुधा वर्मा ने बांसुरी की तान पर झूमती मैं राधिका हूं, गोविंद वल्लभ रमन ने जो मेरे पास आना नहीं चाहता मैं भी उसको बुलाना नहीं चाहता गीत गवनई से दर्शकों का मन मोह लिया।
अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए कविवर सीताराम सिंह ने जिसे मोहब्बत हो गई हर खराबी से तथा औरों की तरह हम सजदे में न झुकेंगे इन चिरागों में नहीं रोशनी और हम आपकी रहमत के तलबगार तो नहीं, हम भी हैं अपने दम पर लाचार तो नहीं’ आदि गायन कर दर्शकों को गंभीर चिंतन के लिए मजबूर कर दिया। स्थानीय कवि तारकेश्वर सिंह ने सोनपुर की धरती हरिहरक्षेत्र महान एवं संभलों देश के पहरेदारों, हरिहरनाथ मंदिर न्यास समिति के सदस्य कृष्णा ने सोनपुर के एक महान संत थे, अविनाश कुमार ने कटाव की पीड़ा पर मर्मस्पर्शी काव्य – पाठ किया। काव्य -पाठ के साथ धन्यवाद ज्ञापन प्रो. वीरमणि राय ने किया।
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