सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला का गुवा गोलीकांड झारखंड के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसे कभी कोई भुला नहीं सकता। उक्त बातें झामुमों के वरीय नेता विपीन पूर्ति ने 19 सितंबर को गुवा दोरे के क्रम में कही।
झामुमो नेता पूर्ति ने कहा कि गुवा गोलीकांड को काला दिन में गिनना इसलिए पड़ रहा है, क्योंकि अस्पताल में इलाजरत आदिवासियों को अस्पताल से निकाल कर लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया गया था। आज उस काले दिन को 45 साल बीत गये, लेकिन जख्म आज भी ताजा है। यह घटना मानव अधिकार का घोर उल्लंघन है। उक्त घटना अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस कानून का उल्लंघन है। जघन्य मामला है।
उन्होंने बताया कि गुवा पश्चिमी सिंहभूम जिले में सारंडा के घने जंगलों के बीच बसा है। इसी गुवा में एक स्मारक है, जो 11 आदिवासियों की शहादत का गवाह है। यह स्मारक इस बात का सबूत है कि गुवा की शहादत कोई सामान्य घटना नहीं है। यह घटना 8 सितंबर 1980 को घटी थी, जब पुलिस की गोली बारी कोई सामान्य घटना नहीं है। यह घटना तब घटी थी, जब पुलिस की गोली से घायल गुवा अस्पताल में इलाज करा रहे 8 आदिवासियों को निकाल कर लाइन में खड़ा कर गोली मार दी गयी थी। उनकी कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। अब वक्त आ गया है क्षेत्र का विकास कर उन शहीदों की सच्ची श्रंद्धाजलि तब होगी जब जमीनी स्तर पर यहां के रहिवासियों को उनका हक मिलेगा।
![]()













Leave a Reply