सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के घने और रहस्यमयी सारंडा जंगल में बसा विजय टू आयरन ओर खदान (माइन) अब पूरी तरह से खामोश हो गई है। जिससे रहिवासियों के घरों का सुख चैन छीन गया है।
भारतीय जनता पार्टी एसटी मोर्चा पश्चिमी सिंहभूम जिला उपाध्यक्ष हरिचरण साण्डिल ने उक्त जानकारी देते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि बीते 17 अगस्त की मध्य रात्रि टाटा स्टील की विजय टू खदान की लीज खत्म हो गई थी। इसके साथ ही वहां काम करने वाले 800 मजदूरों की रोज़ी-रोटी भी छिन गई। पेट की आग से झुलसते घर-परिवार, मजदूर बोले कि खदानें खोलो, रोजगार दो वरना पलायन ही एकमात्र विकल्प रह गया है।
जिला उपाध्यक्ष हरिचरण ने बताया कि अब तक जहां सुबह–सुबह हाईवा गाड़ियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती थी, मजदूरों के चेहरों पर पसीने के साथ उम्मीद की चमक झलकती थी, वहीं अब वीरानी पसरी है। मजदूर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और उनके परिवारों की रसोई में चूल्हा जलाने तक की चिंता गहरा गई है। कहा कि बराईबुरु में कई मजदूरों ने उक्त मसले को ले बैठक की।
मजदूरों का नेतृत्व कर रहे जिला उपाध्यक्ष साण्डिल ने कहा कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो उन्हें सड़क पर उतरना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूख ने रहिवासियों के घरों का चैन छीन लिया है। बैठक में शामिल मजदूरों की आंखों में आंसू थे और शब्दों में दर्द। सच्चाई यह है कि भूूख ने घर-घर का चैन छीन लिया है।
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