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सत्संग विहार में भक्ति व् उल्लास के साथ मना ठाकुर अनुकूलचंद्र का आविर्भाव दिवस

मानव को जन जन कल्याण के कार्य करते रहना चाहिए-ऋत्विक अमरनाथ ठाकुर

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में बड़ाजामदा स्थित सत्संग विहार में 16 सितंबर को युग पुरुषोत्तम श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र का 138वां आविर्भाव दिवस महोत्सव जन्मोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्ति वातावरण में आयोजित किया गया।

इस पावन अवसर पर बड़ाजामदा के अलावा नोवामुंडी, किरीबूरु, गुवा, झींकपानी सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों सत्संगी परिवार बड़ी संख्या में उपस्थित हुए और ठाकुर के चरणों में नतमस्तक होकर दर्शन एवं आशीर्वाद का लाभ उठाया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 5:33 बजे सामूहिक प्रार्थना एवं मांगलिक गान से किया गया। इसके बाद सुबह 7:05 बजे पुनः सामूहिक प्रार्थना, ग्रंथ पाठ और भजन-कीर्तन आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में सराबोर होकर ठाकुर के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट की। सुबह 8:30 बजे जलपान के पश्चात 11:15 बजे धर्म सभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में वक्ताओं ने ठाकुर अनुकूलचन्द्र के जीवन-दर्शन, उनके प्रेम, करुणा और समाज सुधार के संदेशों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर प्रवचनकर्ताओं ने कहा कि ठाकुर का पूरा जीवन मानवता के कल्याण और आत्मिक जागरण के लिए समर्पित था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बोकना सत्संग बिहार प्रभारी सह ऋत्विक अमरनाथ ठाकुर द्वारा ठाकुर अनुकुलचंद्र के भाव को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा गया। ऋत्विक ठाकुर ने कहा कि मनुष्य का गंतव्य ईश्वर प्राप्ति है। सत्संगी को यजन एवं याजन का महत्व बताते हुए उसे अनुकरण करने के लिए उन्होने प्रेरित किया। कहा कि मनुष्य को मानव शरीर सौभाग्य से प्राप्त हुआ है। अतः मानव को जन जन कल्याण के कार्य करते रहना चाहिए।

धर्मसभा के बाद दोपहर 1:30 बजे विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद वितरण के समय सत्संग विहार परिसर में सेवा और समर्पण का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। संध्या प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।
दिनभर सत्संग विहार भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक माहौल से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने इस अवसर को जीवन में एक अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए कहा कि ठाकुरजी के बताए मार्ग पर चलना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी साधना है।

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