एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। दशहरा पर्व के अवसर पर अष्टमी, नवमी एवं दशमी तिथियों को झारखंड राज्य में पूर्ण रुप से शराबबंदी लागू किया जाए। उपरोक्त बाते 14 सितंबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने राज्य के मुख्यमंत्री सहित मंत्री मध निषेध एंव उत्पाद विभाग तथा मुख्य सचिव झारखंड को ई मेल भेजकर कही।
नायक ने कहा कि आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच राज्य के सभी समुदायों के हितों की रक्षा हेतु निरंतर संघर्षरत हैै। हमारा मंच हमेशा से सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक संरक्षण एवं नैतिक मूल्यों की मजबूती के लिए कार्य करता रहा है। कहा कि दशहरा पर्व, जो विजयादशमी के रूप में जाना जाता है, झारखंड मे दशहरा पर्व पवित्र एवं महत्वपूर्ण उत्सव है।
यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है तथा इसमें अष्टमी, नवमी एवं दशमी तिथियां विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठानों, सामूहिक पूजा-अर्चना व् पारिवारिक तथा सामाजिक एकता से जुड़ी होती हैं। किंतु, विगत वर्षो में दशहरा पर्व के दौरान शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति प्रदान करने से राज्य में गंभीर सामाजिक हानि उत्पन्न हुई है। यह न केवल पर्व की पवित्रता को कलंकित करता है, अपितु समाज के विभिन्न स्तरों पर विनाशकारी प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व के दौरान शराब की आसानी से उपलब्धता से झगड़े, मारपीट एवं साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे समाज पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
नायक ने कहा कि इस संदर्भ मे वे सरकार से कड़ाई से अनुरोध एवं मांग करते है कि दशहरा पर्व के अष्टमी, नवमी एवं दशमी के अवसर पर पूरे झारखंड राज्य में शराब की दुकानों, बार एवं अन्य स्थानों पर पूर्ण शराबबंदी लागू की जाए। सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किया जाये तथा आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित किया जाये। यह कदम न केवल सामाजिक हानि को रोकेगा, अपितु राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करेगा। ई मेल संदेश में उन्होंने कहा कि वे सरकार के सकारात्मक एवं त्वरित कार्यवाही की आशा करते है।
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