एस. पी. सक्सेना/बोकारो। उच्च शिक्षण संस्थाओं में यौन उत्पीड़न विषय पर 12 सितंबर को बोकारो जिला के हद में जारंगडीह स्थित के. बी. कॉलेज बेरमो में जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
सेक्सुअल हैरासमेंट प्रिवेंशन सेल की ओर से कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मी नारायण की अध्यक्षता में जंतु शास्त्र सभागार में आयोजित जागरूकता कार्यशाला का उद्घाटन प्राचार्य व् उपस्थित व्याख्याताओं ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्राचार्य लक्ष्मी नारायण ने का कॉलेज द्वारा सेक्सुअल हैरासमेंट प्रिवेंशन सेल का गठन महिलाओं की सुरक्षा हेतु किया गया है, जिसके अध्यक्ष वे स्वयं, कॉर्डिनेटर डॉ अलीशा वंदना लकड़ा, सदस्य डॉ नीला पूर्णीमा तिर्की, डॉ मधुरा केरकेट्टा, मनोवैज्ञानिक सदस्य डॉ प्रभाकर कुमार, डॉ व्यास कुमार, प्रो. सुनीता कुमारी, कलावती देवी हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यशाला और कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि कॉलेज परिसर में एक ऐसी संस्कृति का निर्माण करना है जहां कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न की कोई घटना न हो।
प्रोफेसर इंचार्ज गोपाल प्रजापति ने कहा कि जागरूकता कार्यशाला के माध्यम से महिलाओं में समानता के अधिकार और कार्यस्थल में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना है। कॉर्डिनेटर डॉ अलीशा वंदना लकड़ा ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से यौन उत्पीड़न की परिभाषा, आंतरिक शिकायत समिति के गठन व कार्यप्रणाली, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और क़ानूनी व निवारण तंत्रों की जानकारी देना है।
सदस्य डॉ नीला पूर्णीमा तिर्की ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य एक सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना और यौन उत्पीड़न से छात्रा व् महिला कर्मी को बचाना है। डॉ मधुरा केरकेट्टा ने कहा कि इसके लिए भारतीय कानून पोश अधिनियम बनी है, जो कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाता है। उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करता है और उत्पीड़न की शिकायत को दूर करता है।

डॉ अरुण कुमार रॉय महतो ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से यौन उत्पीड़न के विभिन्न रूपों की पहचान करने तथा उन्हें रोकने के लिए कर्मचारियों को सशक्त बनाना है। डॉ प्रभाकर कुमार ने कहा कि कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न के बारे में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है, ताकि महिलाएं सुरक्षित व सम्मानित महसूस करें। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न की परिभाषा शारीरिक संपर्क, प्रलोभन, यौन अनुग्रह की मांग, यौन टिप्पणी, अश्लील साहित्य दिखाना, यौन प्रकृति का कोई भी अवांछित व्यवहार चाहे वह मौखिक, लिखित व इशारों आदि से हो।
मंच संचालन डॉ नीला पूर्णीमा तिर्की व् धन्यवाद ज्ञापन डॉ मधुरा केरकेट्टा ने किया। कार्यशाला में उपरोक्त के अलावा डॉ व्यास कुमार, डॉ वासुदेव प्रजापति, डॉ अरुण रंजन, डॉ सुशांत बैरा, प्रो. अमीत कुमार रवि, डॉ शशि कुमार, प्रो. सुनीता कुमारी, कार्यालय कर्मी रविंद्र कुमार दास, सदन राम, रवि कुमार यादविंदु, मो. साजिद, शिव चन्द्र झा, बालेश्वर यादव व् छात्र छात्राओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
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