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बीएसएल प्रबंधन की देन है आगामी 5 सितम्बर की हड़ताल-राजेंद्र सिंह

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। हिन्द मजदूर सभा से संबद्ध क्रान्तिकारी इस्पात मजदूर संघ द्वारा आहुत सेल/ बोकारो इस्पात संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस, कोक-ओवन तथा ट्रैफिक विभाग में एकसाथ आगामी 5 सितंबर के पूर्ण हड़ताल के समर्थन में 2 सितंबर को ब्लास्ट फर्नेस नंबर 3 ट्रैफिक स्टेशन पर विशाल सभा आयोजित की गयी। ब्लास्ट फर्नेस तथा ट्रैफिक विभाग की संयुक्त सभा में हड़ताल की प्रतिबद्धता के साथ दोनो विभागो के मजदूर भारी संख्या में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सभा को सम्बोधित करते हुए संघ के महामन्त्री सह-सदस्य एनजेसीएस राजेंद्र सिंह ने कहा कि वे भलीभाँति जानते हैं कि मजदूरो का पेमेंट वक्त के साथ बढ़ता है, मगर बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन का प्रबंध देखिये। यहाँ तनख्वाह बढ़ने के बजाय घटता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में जहाँ आज की तुलना में कम उत्पादन के बावजूद अमूमन ₹ 6000/= इन्सेंटिव रिवॉर्ड मिलता था, वहीं आज रिकार्ड उत्पादन के बाद भी इन्सेंटिव रिवॉर्ड मात्र ₹700/= से ₹1000/= हीं मिलता है।

महामंत्री सिंह ने कहा कि मजदूर खून पसीना झोंक कर सर्वोत्तम उत्पादन करते हैं, वहीं अंधेर नगरी चौपट राजा के तर्ज पर बीएसएल अधिकारी मजदूरो का पेट काटकर स्वयं पीआरपी का मजा ले रहें हैं। कहा कि ऐसा नहीं है कि पूरे सेल में ऐसी हीं व्यवस्था है। यह सिर्फ बोकारो के मानव संसाधन विभाग की कड़ी मेहनत का नतीजा है। ऐसे में यहां के मजदूर हड़ताल ना करें तो करें क्या? रही बात ठेका मजदूरो की तो आपको अंग्रेजी शासन की गुलामी और दासता देखनी है तो बोकारो स्टील प्लांट के ठेका मजदूरो का जीवन देखिये।

जो आपने इतिहास में पढ़ा है यहाँ प्रत्यक्ष है।आईएसओ प्रमाणित महारत्न कंपनी के ठेका मजदूर आज भी बिना साप्ताहिक छुट्टी प्रतिदिन ₹350/= में काम करने को मजबूर हैं और भ्रष्ट अधिकारी ऑल इज वेल की बंशी बजा रहें हैं।उन्होंने कहा कि ईएसआईसी की सीमा से बाहर हो चुके मजदूर और उनके परिजन ईलाज के बिना तड़प-तड़प कर जान गँवा रहे हैं और इनके हीं गाढी कमाई से यहां के अधिकारी फाईव स्टार का आनंद ले रहे हैं।

ठेका मजदूरों को ना आवास की व्यवस्था, ना हीं उनके बच्चो की शिक्षा का प्रबंध। ठेका मजदूरो के ग्रेच्युटी, प्रमोशन तथा नाइट शिफ्ट एलाउंस पर तो प्रबंधन चर्चा के लिये भी तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा तो सिर्फ नारो और कागजो तक हीं सीमित है। सुरक्षा के अभाव में आये दिन मजदूर मर रहें हैं और यहाँ सुरक्षा के नाम पर करोड़ो का टेंडर कर प्लान्ट को लूटा जा रहा है।

बताया कि अभी पिछले हफ्ते हीं यहीं बगल में ठेका मजदूर विनय कुमार की कार्य दुर्घटना में जलकर मृत्यु हो गई। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि लगभग 2000 डिग्री टेंपरेचर में भी यहाँ के मजदूर बिना एफआर (फायर रेसिस्टेटेंट) सूट के काम करने को मजबूर हैं। यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है। बदले में इन्होंने व्यवस्था सुधार के लिये कुछ भी नहीं किया। सिर्फ दो महाप्रबंधक को निलंबित कर अपना पल्ला झाड़ लिया। कहा कि संसाधनो के अभाव में मजदूरो की सुरक्षा भगवान भरोसे हीं है।

निम्नतम सुरक्षा, सर्वोत्तम उत्पादन का जीता जागता सबूत बोकारो स्टील प्लांट है। महामंत्री सिंह ने कहा कि अब बहुत हुआ। अब मजदूर आर -पार की लड़ाई को मजबूर हैं। अगर 3 सितम्बर को सहायक श्रमायुक्त के समक्ष वार्ता विफल होती है। मजदूरो को उनके हक का पाई-पाई देने से प्रबंधन मुकरता है तो आगामी 5 सितम्बर को कोक-ओवन, ब्लास्ट फर्नेस और ट्रैफिक डिपार्टमेंट पूरी तरह से ठप्प रहेगा। इसका जिम्मेवार बीएसएल प्रबंधन होगा। सभा को सिंह के अलावे विपिन कुमार, सुभाष चंद्र कुंभकार, शशिभूषण, अम्बेदकर, मो. इरफान, बासुदेव कुम्भकार, उत्तम मिश्रा, प्रमोद कुमार, मनोज कुमार, मो. शकील, महानन्द, दुर्गेश कुमार, विनोद साव, राहुल आदि ने सम्बोधित किया।

 

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