अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अनुमंडल के दरियापुर प्रखंड बेला शर्माटोला रहिवासी सेना के 27 वर्षीय जवान शहीद छोटू कुमार शर्मा का पार्थिव शरीर 2 सितंबर को दिघवारा प्रखंड के पिपरा गंगा घाट पर पंचतत्व में विलीन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा में भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ ने भारत माता की जय, वंदे मातरम व छोटू शर्मा अमर रहे के नारे लगाते रहे। शहीद वीर सपूत छोटू शर्मा को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई की गई।
इससे पूर्व शहीद छोटू का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके गांव बेला शर्मा टोला पहुंचा, उनके अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भींगी पलकों से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद के परिजन शव से लिपटकर बिलख रहे थे। वहीं, स्थानीय ग्रामीण शहीद के परिजनों को सांत्वना देने में जुटे थे। बाद में तिरंगे में लिपटे शव को दिघवारा प्रखंड के पिपरा गंगा घाट लाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान शहीद जवान को सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। शहीद को उनके भतीजे ऋषभ ने मुखाग्नि दी। सेना के वाहन से ताबूत में रखे गये शव को जब शहीद के दरवाजे पर उतार कर रखा गया, तो पुरा माहौल बेहद गमगीन हो गया। शहीद फौजी छोटू कुमार वर्ष 2017 में दानापुर से आर्मी में बहाल हुए थे। फिलहाल वह श्रीनगर में राष्ट्रीय राइफल की 24 वीं बटालियन में सिपाही के रूप में तैनात थे। बीते 30 अगस्त की शाम लगभग तीन बजे क्यूआरटी अभ्यास के दौरान वे शहीद हो गए थे।
बताया जाता है कि बीते एक सितंबर की शाम लगभग छह बजे उनका पार्थिव शरीर फ्लाइट से पटना लाया गया। वहां से दानापुर आर्मी छावनी ले जाया गया, जहां शाम में ही बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, सवर्ण आयोग के अध्यक्ष डॉ महाचंद्र प्रसाद सिंह, मंत्री रत्नेश सदा, डीजीपी, गृह सचिव, ब्रिगेडियर अमित बेदी, आरएसबी निदेशक ब्रिगेडियर मृगेन्द्र कुमार, ले. कर्नल कुणाल कुमार शर्मा ने पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
वहीं 2 सितंबर की सुबह शहीद जवान का शव सेना के वाहन से उसके घर बेला शर्मा टोला लाया गया। शहीद छोटू चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसकी तीन बहनें भी हैं। एक भाई अपाहिज है और दो अन्य भाई प्राइवेट नौकरी करते हैं। बचपन में ही छोटू के सिर से पिता का साया उठ गया था। इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
विधवा मां कामिनी देवी ने बड़ी तकलीफ से सभी बच्चों को पाला।छोटू कठिन परिश्रम से सेना में बहाल हुए थे। तब घर की स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी। फिर बीते 9 मई को धूमधाम से छोटू की शादी सुष्मिता से हुई थी। किंतु यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाई। सुष्मिता से पति का साथ महज चार महीने में ही छिन गया। शहीद की विधवा पत्नी व विधवा मां की हालत देख पूरा गांव गम में डूबा है।
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