एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़कर नगड़ी के आदिवासी-मूलवासी रैयतों की भावनाओं और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्षों का सम्मान करे। रिम्स टू का निर्माण कृषि भूमि पर न हो। नगड़ी के रैयतों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस से अंग्रेजी राज भी शर्मसार हुआ है।
उपरोक्त बाते 24 अगस्त को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने नगड़ी में रिम्स टू निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आदिवासी-मूलवासी रैयतों पर पुलिस द्वारा बर्बर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पर अपनी प्रतिक्रिया मे कही।
नायक ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार से हमारी अपील है कि नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स टू (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का विस्तार) के लिए आदिवासी-मूलवासी रैयतों की उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण तत्काल रोका जाए।
यह कदम न केवल स्थानीय समुदाय की आजीविका को नष्ट करेगा, बल्कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के दशकों के संघर्ष और आदिवासी अधिकारों की भावना का अपमान भी है। कहा कि सरकार को अपनी जिद छोड़कर वैकल्पिक गैर-कृषि भूमि का रामगढ़ जिला के हफ्ते में नेमरा मे चयन करना चाहिए।
नायक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ आदिवासी मूलवासी रैयतो की भूमि की रक्षा करने का ढोंग कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नगड़ी के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ रैयतों के आंदोलन का समर्थन किया था और वैकल्पिक स्थानों पर विचार करने का आश्वासन दिया था।
इसके बावजूद, आज तक कुछ नही किया गया। उन्होंने कहा कि झामुमो का इतिहास भी भूमि और आदिवासी मूलवासी अधिकारों की रक्षा से भरा पड़ा है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने नगड़ी और आसपास के क्षेत्रों में भूमि बचाओ आंदोलन चलाया था। हजारों रैयतों ने रांची में प्रदर्शन किया, जिसके बाद सरकार को अधिग्रहण की प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी। मगर हेमंत सोरेन की सरकार दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सपनो को पैरो तले कुचलने का कुत्सित प्रयास कर रही है। जिससे आज उनकी विरासत पर खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने कहा कि नगड़ी में रिम्स टू निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आदिवासी-मूलवासी रैयतों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।
इस क्रूर कार्रवाई में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घायल हुए है। यह दृश्य इतना अमानवीय था कि अंग्रेजी शासन के दमनकारी तरीके भी इसके सामने फीके पड़ जाएं। यह दिशोम गुरु के सपनों का झारखंड नहीं है, जहां रैयत अपनी ही जमीन बचाने के लिए सड़कों पर लाठी खाए। कहा कि यदि सरकार ने हमारी मांगों को अनसुना किया, तो आदिवासी मूलवासी रैयत बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे। हम अपनी जमीन और सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
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