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विषम परिस्थिति में भी भगवान का स्मरण नहीं छोड़ना चाहिए-आचार्य कृष्ण शास्त्री

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महोत्सव में भक्तों ने किया ध्रुव-नारायण झांकी दर्शन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। उत्तर प्रदेश के देव भूमि वृन्दावन धाम से पधारे भागवत रत्न आचार्य सुमन्त कृष्ण शास्त्री कन्हैयाजी महाराज ने 21 अगस्त को सारण जिला के हद में बाबा हरिहरनाथ मंदिर के सत्संग भवन में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को पांडवो का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति का दर्शन कराया।
श्रोताओं को संबोधित करते हुए आचार्य सुमन्त कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान की कथा श्रवण से मानसिक तनाव दूर होता है। इसलिए विषम परिस्थिति में भी भगवान का चिंतन नहीं छोड़ना चाहिए। इस अवसर पर भक्तों ने ध्रुव-नारायण की झांकी का दर्शन किया।

आचार्य कन्हैयाजी महाराज ने कहा कि पांडवों से यह शिक्षा लेनी चाहिये कि सब कुछ खो देने के बाद भी पांडवो ने भगवान श्रीकृष्ण का साथ नहीं छोड़ा। कुंती स्तुति प्रकरण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दु:ख के समय घबराने के बजाय भगवान का भजन – कीर्तन और ज़्यादा से ज़्यादा करना चाहिए। जैसे धूप बारिश में हम छाता से बचाव करते हैं। बीमार होने पर दवा से बचाव करते हैं। ऐसे ही संकट काल में भजन का आश्रय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए अवस्था और व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होती। उनको पाने के लिए तो भक्तों में आस्था होनी चाहिए।
कन्हैयाजी महाराज ने कहा कि भक्त ध्रुव ने मात्र 5 वर्ष की अवस्था में भगवान को प्राप्त कर लिया था।

कथा प्रसंग के अनुसार ही उपस्थित भक्त जनों को बहुत ही सुंदर ध्रुव नारायण की झांकी का दर्शन कराया गया। सभी भक्तों ने जमकर आनन्द प्राप्त किया। पंडाल का वातावरण भक्तिमय हो गया, राधे राधे की गूंज से पूरा वातावरण गुंजायमान हो गया।

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