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प्रबंधन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय पर प्रदर्शन

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। सेल/बोकारो इस्पात संयंत्र के ट्रैफिक विभाग के मजदूरों ने क्रान्तिकारी इस्पात मजदूर संघ सम्बद्ध हिन्द मजदूर सभा के नेतृत्व में 18 अगस्त को प्रदर्शन किया। प्रबंधन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय पर उक्त प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संघ के महामंत्री सह-सदस्य एनजेसीएस राजेंद्र सिंह ने कहा कि बीएसएल यातायात विभाग यानि ट्रैफिक डिपार्टमेंट शोषण का उत्कृष्ट उदाहरण है। कहा कि आपको अंग्रेजी शासन की गुलामी और दासता से रूबरू होना है तो ट्रैफिक डिपार्टमेंट का उदाहरण आपके सामने प्रस्तुत है। यातायात प्रबंधन के असीम दया से यहाँ के मजदूर आज के दौर में भी बिना किसी छुट्टी के लगातार तीसो दिन सिर्फ ₹350 प्रतिदिन मजदूरी करने को मजबूर हैं।

कहा कि प्रबंधन अपने लाडले ठेकेदारो को न्याय और अधिकार की आवाज उठाने वाले मजदूरो को मारने, गाली-गलौज कर धमकाने तथा काम से निकाल देने की खुली छुट दे रखी है। शोषित मजदूर गर्मी से झुलस कर सर्वोत्तम उत्पादन का इतिहास रच रहें हैं और ठेकेदार व् अधिकारी एसी कमरे में बैठकर ठेकेदारो के साथ मुनाफे में हिस्सेदारी बाँट प्लान्ट को लूट रहें हैं।ये ना सिर्फ मिनिमम वेज की डकैती कर रहें हैं, बल्कि ईएल, बोनस तथा फाईनल भी डकार कर अय्याशी कर रहें हैं।

महामंत्री सिंह ने तल्ख लहजे में कहा कि सेल प्रबंधन की तानाशाही और निरंकुशता किसी परिचय की मोहताज हीं नहीं है। सभी जानते हैं एक तो घोर विलंब के बाद वेज रिवीजन वह भी अधूरा। 39 माह के एरियर पर इनका रवैया बेहद आक्रोशित करने वाला है। इनका इन्सेंटिव रिवॉर्ड स्कीम भी ऐसा कि मजदूरो को लाभ के बजाय हानि हो रहा है। उन्होंने कहा कि बोकारो में सेल के विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण पर जहाँ एक ओर बोकारो की जनता, बेरोजगार और विस्थापित युवा अपने भविष्य को लेकर काफी आशान्वित हैं।

वहीं दूसरी ओर ऐसा लगता है कि बोकारो से विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण छिन सेल चैयरमेन बोकारो पृष्ठभूमि के बावजूद बोकारो के विनाश को प्रतिबद्ध हैं। रही बात बोकारो प्रबंधन की ठेका मजदूरो के प्रति रवैये की तो ठेका मजदूर को तो ये मजदूर मानते हीं नहीं हैं। मानते हैं तो सिर्फ गुलाम। ना कोई जाॅब सिक्युरिटी, ना मिनिमम वेजेज, ना ईलाज, ना ग्रेच्युटी, ना नाइट शिफ्ट एलाउंस, ना अन्य (आवास, शिक्षा, वाशिंग, साइकिल आदि) कोई भत्ता, ना कोई प्रमोशन पाॅलिसी, ना सुरक्षा, ना आवश्यक मेन पावर। कुल मिलाकर कुछ देना नहीं है, मगर सर्वोत्तम उत्पादन लेना है। मजदूर जिये या मरें, प्रबंधन को कुछ फर्क नहीं।

मतलब शाॅप स्तर से कार्पोरेट तक सब के सब तानाशाह और भ्रष्ट बैठे हैं। महामंत्री सिंह ने प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि बहुत हुआ अब मजदूर जागृत हो गये हैं और विधि सम्मत अधिकार के लिये आन्दोलित हैं। आगामी 5 सितम्बर तक का समय है। मजदूरो के साथ यदि न्याय नहीं हुआ तो 5 सितम्बर को कोक-ओवन, ब्लास्ट फर्नेस और ट्रैफिक विभाग एक साथ ठप्प रहेगा। प्रदर्शन को सिंह के अलावे आर के सिंह, सुभाष चंद्र कुंभकार, शशिभूषण, ए के चौधरी, एस के ओझा, राजू साहनी, शकील अहमद, महानन्द, याकुब अंसारी, सिराजुद्दीन अंसारी, विभूति महतो, मीर हुसैन, के के सिन्हा, रमेश, विजेंद्र कुमार, मिनाज अंसारी आदि ने भी संबोधित किया।

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