पीयूष पांडेय/ बड़बिल (ओडिशा)। मेक इन इंडिया के तहत जेएसडब्ल्यू स्टील और दक्षिण कोरिया का पॉस्को समूह भारत में छह मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाला एक एकीकृत इस्पात संयंत्र स्थापित करने की संभावना तलाश रहे हैं। जैसा कि जेएसडब्ल्यू द्वारा 18 अगस्त को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया।
जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि उपरोक्त दोनों कंपनियों ने संभावित फिफ्टी-फिफ्टी प्रतिशत की हिस्सेदारी के तहत संयुक्त रूप से संयंत्र स्थापित करने के लिए एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन (एचओए) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता बीते वर्ष अक्टूबर 2024 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का विस्तार करता है और सहयोग के व्यापक ढाँचे की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। इस समझौता ज्ञापन पर मुंबई में, पॉस्को होल्डिंग्स के प्रतिनिधि निदेशक और अध्यक्ष ली जू-ताए और जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक सह सीईओ जयंत आचार्य की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं सीईओ जयंत आचार्य ने कहा कि यह साझेदारी जेएसडब्ल्यू की सिद्ध निष्पादन क्षमताओं और मजबूत घरेलू उपस्थिति को इस्पात निर्माण में पॉस्को के तकनीकी नेतृत्व के साथ जोड़ती है। प्रस्तावित उद्यम देश के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है और घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों की सेवा के लिए एक वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाने में मदद करेगा। पॉस्को होल्डिंग्स प्रतिनिधि निदेशक द्वारा कहा गया कि भारत वैश्विक इस्पात मांग के भविष्य का केंद्र बिंदु है। जेएसडब्ल्यू के साथ हमारा सहयोग आपसी विश्वास और साझा दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर आधारित है।
यह पहल भारत के औद्योगिक विकास को सहयोग देने और साथ ही दोनों संगठनों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पॉस्को समूह दक्षिण कोरिया का एक अग्रणी औद्योगिक समूह है और अपनी उत्पादन क्षमताओं और इस्पात, द्वितीयक बैटरी सामग्री, निर्माण और ऊर्जा जैसे विविध व्यावसायिक पोर्टफोलियो के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है। पोहांग और ग्वांगयांग स्थित एकीकृत संयंत्रों से संचालित इसके इस्पात प्रभाग की कच्चे इस्पात उत्पादन क्षमता लगभग 42 मिलियन टन प्रति वर्ष है।
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