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शोषण के विरूद्ध संघर्ष में ब्लास्ट फर्नेस का स्वर्णिम इतिहास-महामंत्री

आगामी 5 सितम्बर को कोक ओवन व् धमन भट्ठी में चक्का जाम-राजेंद्र सिंह

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। सेल और बोकारो इस्पात प्रबंधन की निरंकुश और नकारात्मक नीतियों से आक्रोशित मजदूरो ने क्रान्तिकारी इस्पात मजदूर संघ सम्बद्ध हिन्द मजदूर सभा के नेतृत्व में सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय पर 16 अगस्त को जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन ब्लास्ट फर्नेस क्रमांक तीन से रैली के रूप में प्रारंभ होकर मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय पर पहुंचकर विशाल सभा में तब्दील हो गई। सभा में बड़ी संख्या में इस्पात व् ठेका मजदूर शामिल थे। प्रदर्शन व् सभा का नेतृत्व कर रहे संघ के महामंत्री सह सदस्य एनजेसीएस राजेंद्र सिंह ने सेल एवं बोकारो इस्पात प्रबंधन को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सेल चैयरमेन सत्ता के नशे मे अंधे हो गये हैं। उन्होंने कहा कि 39 महीने के एरियर पर इनकी नीति समझ से परे और आक्रोशित करने वाली है इनकी तानाशाही का आलम यह है कि मुख्य श्रमायुक्त के आदेश से भी अपने आप को ऊपर समझने लगे हैं। कहा कि बोकारो की पृष्ठभूमि के बावजूद विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण को छिन बोकारो को बर्बाद करने पर तुले हैं।

उन्होंने कहा कि जिस बोकारो की पावन भूमि ने इन्हें फर्श से अर्श तक पहुँचाया, आज उसी को लात मार रहें है। सेल छोड़ कोल इण्डिया के चेयरमैन बनने की जुगाड़ लगा रहें हैं। बोकारो प्रबंधन का हाल भी कुछ ऐसा हीं है। वर्षो पुरानी घिसी पिटी इन्सेंटिव रिवॉर्ड स्कीम तथा क्षमता से अधिक उत्पादन लक्ष्य तय कर मजदूरो को सर्वोत्तम उत्पादन के बाद भी इनाम स्वरूप आर्थिक दण्ड दिया जा रहा है।

महामंत्री ने कहा कि ठेका मजदूरों की स्थिति तो गुलामी के दिनो का जीता जागता उदाहरण है। प्लांट को दिन रात खून पसीने से सींचने के बावजूद स्किल्ड ठेका मजदूर अपना और अपने परिवार के ईलाज के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहें हैं। अधिकारी पाँच सितारा होटलो में बिरयानी उड़ा रहें है। ठेकेदार मुनाफा कमाने के लिये नये नये मजदूरो से स्किल्ड मजदूरो का काम ले रहें है। आये दिन दुर्घटनाएँ हो रहीं हैं, मगर काम मे माहिर हो चुके अनस्किल्ड मजदूरो को स्किल्ड बनाने मे इनकी नानी मरने लगती है।अब तो होश धरिये, ग्रेड प्रमोशन (यूएसडब्लू से एसडब्लू) पर सटीक पॉलिसी बनाइये।

एडब्लूए को वेज का भाग बताकर मजदूरो को ईएसआईसी से बाहर तो कर दिये, मगर जब पीएफ काटने की बात आती है तो इसी एडब्लूए को वेज का भाग मानते से इन्कार कर रहे हैं।गजब दोगलापन है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को ना ग्रेच्युटी, ना नाइट शिफ्ट एलाउंस, ना अन्य किसी प्रकार (शिक्षा,आवास, इंसेंटिव) का भत्ता मिलता है।

मिलता है तो सिर्फ भवन निर्माण का न्युनतम मजदूरी, उसमे भी छीना झपटी। गेट पास बनने के पूर्व मेडिकल चेकअप के लिये इनके पास संसाधन है, मगर काम करते हुए बीमार पड़ने पर मजदूर के ईलाज के लिये इनके पास संसाधन का अभाव हो जाता है। कहते हुए भी शर्म आ रही है कि आज 21वीं सदी में भी महारत्न कंपनी के मजदूर निरंकुश प्रबंधन के कारण मूलभूत सुविधाओ से वंचित हैं। कहा कि सुरक्षा तो भगवान भरोसे हीं है। आये दिन मजदूर जख्मी हो रहे हैं।

जान गँवा रहे हैं। अभी पिछले दिनों हीं बगल के कैपिटल रिपेयर में एक मजदूर शिव योगी शर्मा का कार्य दुर्घटना में मृत्यु इनकी सुरक्षा तत्परता को साफ उजागर करता है। यह कोई पहली घटना नहीं है, अमूमन हर महीने इस प्रकार की घटनाएँ घट रहीं हैं। कहा कि कवच के नाम पर लूट मचा रखा है। मजदूर मर रहें हैं और ये ठेकेदार के साथ बैठकर कागज पर स्टार स्टार खेल रहें हैं। एपेक्स कमिटी की मीटिंग की परम्परा खत्म कर मजदूरो के आवाज को दबाया जा रहा है। मजदूर जीये तो जीये कैसे? सिर्फ तानाशाही हीं नहीं भ्रष्टाचार भी चरम पर है।

उन्होंने कहा कि फर्नेस क्रमांक 5 में स्कीप डिरेलमेन्ट की घटना आम है। थुक पाॅलिस किया जाता है। जैसे तैसे मेन्टनेन्स हो रहा है। देश को करोड़ो का चुना लगाकर ठेकेदार और अधिकारी पैसे का बन्दरबाँट कर रहें हैं। उनकी मांग है कि अविलम्ब उच्च स्तरीय जाँच कर दोषी को दण्डित करो।
महामंत्री सिंह ने चेतावनी देते हुये कहा कि अब बहुत हुआ, अब पानी सर के ऊपर जा चुका है। मजदूर एकजुट होकर आर पार की लड़ाई के मुड में हैं। कहा कि इतिहास गवाह है धमन भट्ठी के मजदूर जब लड़ाई मे उतरते हैं तो दिल्ली भी थर्रा उठती है। आपके पास 5 सितम्बर तक का समय है, मजदूरो के साथ विधि सम्मत न्याय कीजिये नहीं तो हड़ताल के लिये तैयार रहिये।

प्रदर्शन सभा को महामंत्री सिंह के अलावे आर के सिंह, शशिभूषण, सुभाष चंद्र कुंभकार, विपिन कुमार सिंह, अम्बेडकर, संतोष कुमार, अरविन्द कुमार, विजय कुमार, आर पी सिंह, मो. इरफान, संतोष कर्मकार, चन्द्र प्रकाश, असलम अंसारी, बाल गोविंद किस्कु, एल बी अंसारी, बासुदेव कुम्भकार, उत्तम मिश्रा, प्रमोद कुमार, अरूण भगत, राकेश रौशन, शंकर रवानी आदि ने संबोधित किया।

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