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शहीद के दौहित्रों का संकल्प नाना महेश्वर के कृति-पताका को हमेशा लहराते रहेंगे

भारत माता के सच्चे सपूत थे अमर शहीद वीर महेश्वर सिंह

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 15 अगस्त 1942 को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सारण जिला के हद में सोनपुर रेलवे स्टेशन पर अंग्रेजों की गोली से अपनी शहादत देने वाले सोनपुर गांव के अमर शहीद वीर महेश्वर सिंह स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की शान हैं। सोनपुर के जिस चौक पर उनका स्मारक है वह शहीद महेश्वर चौक के नाम से विख्यात है।

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अगस्त क्रांति के वे सोनपुर में नायक थे और 15 अगस्त 1942 को क्रांतिकारी युवकों के दल का नेतृत्व करते हुए सोनपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें गोली मारी थी। तब वन्दे मातरम कहते हुए उन्होंने मातृभूमि के चरणों में अपने को समर्पित कर दिया था। उनके दो अन्य साथी भी अंग्रेजो की गोली से शहीद हुए थे। अमर शहीद महेश्वर सिंह की दो पुत्रियों में सबसे बड़ी की शादी माधवेन्द्र कुमार सिंह उर्फ माधो सिंह के साथ हुई थी, जो अपने ससुराल में ही बस गए। सोनपुर के विकास में इस परिवार की उल्लेखनीय भूमिका है।

शहीद महेश्वर सिंह के दौहित्रों एवं माधो बाबू के बड़े पुत्र धर्मेंद्र कुमार सिंह उर्फ मुन्नाजी, मंझले ब्रजेंद्र कुमार सिंह एवं छोटे पुत्र ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह उर्फ टुनटुन बताते हैं कि वे अपने नाना शहीद महेश्वर के कृति -पताका को वे हमेशा लहराते रहेंगे। जीवन पर्यंत इस भूमि के विकास के लिए हर संभव कार्य करते रहेंगे।

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