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स्वाति के जेपीएससी में 127वां रैंक लाने पर अनिल अग्रवाल ने किया सम्मानित

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में करगली रेलवे कॉलोनी रहिवासी व् मध्य विद्यालय करगली बाजार के पारा शिक्षक अजय कुमार कुंवर तथा गृहिणी भारती देवी की पुत्री कुमारी स्वाति ने जेपीएससी परीक्षा में 127वां रैंक हासिल कर शिक्षा पदाधिकारी के रुप में चयनीत हुई।

सूचना पाकर झामुमो नेता व् समाजसेवी सह अखिल भारतीय अग्रवाल कल्याण महासभा के अध्यक्ष अनील अग्रवाल ने 27 जुलाई को स्वाति के आवास जाकर उन्हें पुष्प गुच्छ, चुनरी तथा मिठाई खिलाकर सम्मानित की तथा इस सफलता के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी।

मौके पर अग्रवाल ने कहा कि सच्चे मन से प्रयास किया जाए तो सफलता कदम चूमेगी। उन्होंने कहा कि स्वाति की यह उपलब्धि अपने आप में उदाहरण योग्य है। वहीं जेपीएससी उत्तीर्ण स्वाति ने बताया कि मैट्रीक की पढाई उन्होंने कार्मेल स्कूल करगली में 2012 में पास की, इंटर डीवीए ढ़ोरी से, स्नातक संत कॉलंबा कॉलेज हजारीबाग में 2017 से तथा मास्टर डिग्री विनोबा भावे यूनिवर्सिटी से की है।

कहा कि उनकी शुरु से ही जेपीपीएस में जाने की इच्छा थी, लेकिन पहले प्रयास में इंटरभ्यू तक पहुंचने के बाद भी मैरिट लिस्ट में नहीं आ पायी। अंतत: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रांची में ऑडिटर (लेखा परीक्षक) का पद हासिल की। नियोजन मिलने के बावजूद नौकरी टाइम के बाद रात 8 से 11 बजे तक तथा सुबह में ड्यूटी जाने से पहले 6 से 8 बजे तक पढ़ाई जारी रखी। ऑफिस में भी लंच ब्रेक में पढ़ाई करती थी।

परिणामस्वरूप इस बार जेपीएससी में यह सफलता मिली है। इसमें ईश्वर, उनके माता पिता, बड़ी बहन, गुरुजनों तथा मित्रों का आशिर्वाद रहा। कहा कि अपना प्रयास होगा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था ऐसी बने जिसमें बच्चे सरकारी विद्यालय की ओर आकर्षित होकर गरीब बच्चे भी बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें। उन्होंने कहा कि यहां तक पहुंचाने में उन्होंने कोचिंग का सहारा नहीं लिया है। मैंने सोशल मीडिया और यूट्यूब से अपनी पढ़ाई की। खुद से नोट्स बनाकर पढ़ाई की।

उन्होंने जेपीएससी की तैयारी कर रहे बच्चों से कहा कि सोशल मीडिया पर जितने भी अफवाह दिखती हैं उनसे बचे और तैयारी करते रहे। नकारात्मकता से दूर रहे और सोशल मीडिया को पढ़ाई के उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल कर तैयारी करते रहे, सफलता जरूर हासिल होगी। कहा कि सरकारी स्कूलों में भी प्राइवेट स्कूल की तरह डिजिटल क्लासेस हो। जिससे बच्चों को पढ़ाई करने में सहूलियत होगी। सेवा भावना लक्ष्य में शामिल रहना चाहिए।

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