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जनवादी लेखक संघ का दो दिवसीय सम्मेलन में विश्व में युद्ध पर चिंता

लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष को ले 21 सदस्यीय कार्यकरिणी गठित

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो इस्पात नगर के सेक्टर छह में जनवादी लेखक संघ (जलेस) का राज्य स्तरीय दो दिवसीय सम्मेलन 27 जुलाई को समापन हो गया। अध्यक्षता डॉ बजरंग बिहारी तिवारी, डॉ अली इमाम खान, डॉ मृणाल, प्रह्लाद चन्द्र दास और गोपाल प्रसाद की अध्यक्ष मंडली ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर सर्वप्रथम जलेस के कार्यकारिणी का प्रस्ताव झारखंड राज्य सचिव कुमार सत्येन्द्र ने प्रस्तुत किया, जिसमें व्यापक चर्चा की गयी। प्रतिवेदन में पूंजीवाद द्वारा विश्व में युद्ध थोपने पर चिंता व्यक्त की गई। केन्द्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों तथा मजदूर विरोधी बदलाव की आलोचना की गई। कार्यक्रम में युद्ध विरोधी, केन्द्र सरकार द्वारा लागू नई शिक्षा नीति विरोधी, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला विरोधी, देश के सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने के खिलाफ, विस्थापन विरोधी और झारखंड के जल, जंगल और जमीन के लूट के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए। ‌

इस अवसर पर झारखंड में संगठन विस्तार के लिए 21 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें प्रह्लाद चन्द्र दास को अध्यक्ष, एम. जेड. खान को कार्यकारी अध्यक्ष, कुमार सत्येन्द्र को सचिव, अशोक कुमार को कार्यकारी सचिव, वरुण प्रभात को कोषाध्यक्ष चुना गया।

ज्ञात हो कि, बीते 26 जुलाई को जनवादी लेखक संघ का दो दिवसीय सम्मेलन डॉ नर नारायण तिवारी नगर (अल हबीब आडिटोरियम), सेक्टर-6, बोकारो इस्पात नगर स्थित प्राणेश कुमार मंच में आयोजित किया गया। बैठक के प्रथम सत्र में विश्व-शांति और समाजवाद के लिए संघर्ष में मारे गए शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। डॉ अली इमाम खान, डॉ मृणाल, गोपाल प्रसाद और प्रह्लाद चन्द्र दास की अध्यक्षता में नई दिल्ली से पधारे प्रख्यात आलोचक डॉ बजरंग बिहारी तिवारी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर डॉ तिवारी ने कहा कि वर्तमान में फासीवादी ताकतें देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सुनियोजित हमले कर रही हैं। सरकार के मनुवादी सोच के सैकड़ों उदाहरण हैं। ऐसे में जनवादी लेखकों का दायित्व बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिक्रियावादी सरकार के खिलाफ संघर्ष करने का सबसे उचित समय आ गया है। वर्तमान सरकार धर्म के नाम पर आमजनों के मन में जो जहर भर रही है, वह बहुत खतरनाक खेल है।

मुख्य अतिथि सेंट्रल विश्वविद्यालय गयाजी के व्याख्याता डॉ कर्मानंद आर्य ने कहा कि अम्बेडकरवादी हो या जनवादी, सभी साहित्यकारों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एक होकर पूंजीवादी और सम्प्रदायवादी ताकतों के खिलाफ संघर्ष तेज करना होगा। उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान सरकार मनुवाद के रास्ते पर अग्रसर है। ऐसे में जनवादी शक्तियों को एकजुट होकर लोकतंत्र के लिए संघर्ष करना होगा। इस सत्र में कुल छः किताबों का विमोचन किया गया, जिसमें जलेस झारखंड की स्मारिका, रेखांकन पत्रिका, डॉ मृणाल की प्रेमचंद हमारे हमसफ़र, शिव कुमार पंडित के उपन्यास तड़प एक लड़की की, प्राणेश कुमार संपादित खामोशी की आवाज (कहानी संग्रह) और पीर और गहरी हो गई (गीत-गजल संग्रह) है।

बैठक का दूसरा सत्र डॉ अली इमाम खान, पी. सी. दास और डॉ मृणाल की अध्यक्षता में की गयी। इस सत्र में साहित्य का सामाजिक सरोकार पर कथाकार अशोक कुमार ने अपना आलेख पढ़ा। इस पर बहस में गोपाल प्रसाद, ओमराज, डॉ किरण, शैलेन्द्र अस्थाना, डॉ सुजाता कुमारी, डॉ मृणाल, डॉ जमशेद कमर, परवेज शीतल, डॉ बजरंग बिहारी तिवारी ने विस्तार से विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दलित, आदिवासी, मजदूरों, किसानों या महिलाओं का आंदोलन हो, साहित्यकारों को जनवादी चेतना के साथ इन आंदोलनों का समर्थन करना पड़ेगा।

कार्यक्रम का संचालन जनवादी लेखक अशोक कुमार और कुमार सत्येन्द्र ने संयुक्त रूप से किया। इस सम्मेलन में झारखंड के सभी जिलों के साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार डॉ मृणाल को रमणिका गुप्ता साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।

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