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रंग जलसा में लोक पंच की प्रस्तुति नाट्य शिक्षक की बहाली का मंचन

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला में 17 सितंबर को चर्चित नाटक नाट्य शिक्षक की बहाली का मंचन किया गया। रंग जलसा में लोक पंच की प्रस्तुति नाट्य शिक्षक की बहाली नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।

प्रसिद्ध रंगकर्मी मनीष महिवाल लिखित व् निर्देशित नाटक नाट्य शिक्षक की बहाली वस्तुतः रंगकर्मियों के जीवन के संघर्ष, उनकी कलात्मकता और उनके प्रति हो रहे उपेक्षित व्यवहार को दिखाता है। एक रंगकर्मी को कला की बाकी विधाओ यथाः गायन, वादन, चित्रकारी, मूर्तिकला आदि से कम सम्मान मिलता है।

इसे यूँ कहे कि उन्हें सम्मान मिलता ही नहीं। जब मंच पर उसका अभिनय अच्छा होता है, तो दर्शक जमकर तालियाँ बजाकर कलाकारों का उत्साह वर्द्धन करते तो हैं, पर घर पर उसे माता- पिता, दोस्त यार और परिचितों के तानें सुनने पड़ते हैं। जिसमें कुछ काम क्यों नहीं करते ?

नाटक नौटंकी में क्या रखा है? क्यों नाच-गान में जीवन गँवा रहे हो? कुछ काम करो, जिससे दो पैसे घर में आए। ऐसा ही रहा, तो कहीं के नहीं रहोगे। माँ बाप घर से निकाल बाहर करेंगे और कोई लड़की भी नहीं मिलेगी शादी के लिए।

जबकि एक रंगकर्मी अशिक्षित नहीं होता, बल्कि उसे आम जनता से अधिक शिक्षित, अधिक सजग बनना पड़ता है। बावजूद इसके यह कितनी बड़ी विडम्बना है कि उनके लिए रोज़गार के साधन ना के बराबर है। विद्यालयों में संगीत तथा नृत्य शिक्षक तो होते हैं, पर नाट्य शिक्षक नहीं होते। क्योंकि, यह अनिवार्य नियम नहीं है।

इस नाटक के माध्यम से लेखक मनीष महीवाल द्वारा सरकार, समाज से यह अपील की गई है कि हम उपेक्षित कलाकारों पर सरकार ध्यान दे। उन्हें रोज़‌गार के अवसर दे। बंद पड़े अनुदानों को शुरू किया जाए और विद्यालयों में नाट्य शिक्षक की बहाली हो। ताकि सरस्वती की ये संतानें अपना जीवन यापन कर सके और प्रसन्न होकर समाज के उत्थान में अपना योगदान दे सके।

प्रस्तुत नाटक नाट्य शिक्षक की बहाली में मनीष महिवाल, रजनीश पांडेय, दीपा दीक्षित, सोनम कुमारी, प्रियंका सिंह, अरविंद कुमार, अभिषेक राज, राम प्रवेश, सत्यम, अजीत कुमार, रोहित कुमार एवं डॉ विवेक ओझा ने बेहतरीन अभिनय प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। उक्त नाटक के लेखक एवं निर्देशक मनीष महिवाल हैं।

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