संत बाबा रामलखन दास की पुण्यतिथि पर कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि
प्रहरी संवाददाता/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में बिहार के सुप्रसिद्ध सोनपुर के लोकसेवा आश्रम प्रेक्षा गृह में आयोजित 84वां शास्त्रीय नृत्य, संगीत और वाद्य सम्मेलन 8 अगस्त की सुबह संपन्न हो गया। इस अवसर पर मंच पर देशी-विदेशी कलाकारों ने रात भर अपने शास्त्रीय नृत्य, संगीत गायन की प्रस्तुति से संगीत सम्मेलन के संस्थापक संत बाबा राम लखन दास जी महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जानकारी के अनुसार इस बार बीते 7 अगस्त को संत बाबा राम लखन दास की 55वीं पुण्यतिथि पर आयोजित संगीत वाद्य एवं नृत्य सम्मेलन के अवसर पर सुर -लय-ताल से सजी संगीत संध्या में श्रोता झूमते नज़र आए। सरस्वती वंदना, ॐ मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। मैंने लाखों के बोल सहे.. ठुमरी और बरसन लागो बूंदियारा जागे.. दादरा के साथ संगीत मयी संध्या की भव्य शुरूआत की गयी।
इस अवसर पर पं. रणधीर दास के बांसुरी वादन की मनमोहक ध्वनि ने दर्शक -श्रोताओं का मन मोह लिया। सितार वादक आशीष कुमार चटर्जी तथा नीरज कुमार मिश्रा का सितार वादन उपस्थित श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध कर गया।
वैशाली के पूर्व जिला जज दिनेश कुमार शर्मा ने भी अपनी संगीत सेवा अर्पित करते हुए प्रथम एक शिव भजन विनती सुनो मोरी काशी बसैया (राग- यमन, झपताल), ठुमरी तुम राधे बनो श्याम( राग- मिश्र-पीलू, ताल- अद्धा) और ग़ज़ल ये इश्क नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे, एक आग का दरिया है और डूब के जाना है (राग -पीलू-भैरवी मेल, ताल- कहरवा) प्रस्तुत किया।

उनके साथ तबला पर मिथिलेश राय ने संगत किया। यहां कथक नृत्य में छपरा की कुमारी रूपा सराही गईं। उन्होंमे अपने पक्ष में खूब तालियां बटोरीं। कुमारी रीना के गायन सखी री मोरी श्याम बिन ब्रज सुना श्रोताओं को भाया।
कार्यक्रम में आनंद गुप्ता और कृष्णेंदु दत्ता ने अपने चिर-परिचित अंदाज में बेहतरीन संगीत साज से दर्शकों का जमकर मनोरंजन किया। कोलकाता की अंकिता चटर्जी का कथक नृत्य भाव-भंगिमा एवं उनके साथ तबले पर समरजीत बनर्जी, हारमोनियम पर राजदीप रे साथ दे रहे थे। वहीं सुदीप चटर्जी ने तबले पर तीन ताल का अद्भुत कला का प्रदर्शन किया।
बांग्लादेश के रिटन कुमार धर ने राग रागेश्वरी एवं एक ताल पर दर्शकों की वाहवाही बटोरी। कोलकाता के ही सुलगना बनर्जी का कथक नृत्य एवं सुचेता गांगुली का गायन भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया। उद्घोषक के रूप में डॉ अशोक कुमार सिंह गौतम एवं आचार्य चंद्र किशोर प्रसाद अंत तक मंच पर जमें रहे।
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