सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन के मल्टी-डिसीप्लिनरी डिवीजनल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (एमडीडीटीआई) में 30 अक्टूबर को रेलकर्मियों को सड़क सुरक्षा, गोल्डन ऑवर, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने सड़क सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण के दौरान कहा कि सड़क दुर्घटना केवल एक इंसान की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करने वाली गंभीर समस्या है। कहा कि दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान सही समय पर प्राथमिक उपचार और आपातकालीन सहायता मिलने से घायल की जान बचाने तथा गंभीर परिणामों को कम करने में मदद मिल सकती है।
सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने एमडीडीटीआई में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में रेलकर्मियों को सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों, घटनास्थल पर बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार, सीपीआर, एम्बुलेंस सेवा और नेक मददगार (गुड समैरिटन) की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेज गति से वाहन चलाना, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का प्रयोग, नशीले पदार्थों का सेवन कर वाहन चलाना, थकान एवं नींद की स्थिति में ड्राइविंग, यातायात नियमों की अनदेखी, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना, खराब मौसम तथा सड़क की खराब स्थिति दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर मौजूद आमजन यानी बाईस्टैंडर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। दुर्घटना स्थल को सुरक्षित करना, तुरंत आपातकालीन सहायता बुलाना, घायल की स्थिति का आकलन करना और अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित करने जैसे कदम जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित द्वारा सीपीआर देना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, सिर या रीढ़ की चोट की आशंका होने पर घायल को अनावश्यक रूप से खींचकर या हिलाकर नहीं निकालना चाहिए। फ्रैक्चर की स्थिति में भी सावधानीपूर्वक प्राथमिक उपचार करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कई बार कानूनी कार्रवाई का डर, पुलिस एवं अस्पताल की प्रक्रिया को लेकर भ्रम, समय की कमी, खून देखकर घबराहट और जिम्मेदारी लेने की आशंका के कारण आमजन दुर्घटनाग्रस्त की सहायता करने से पीछे हट जाते हैं। कई यह सोचकर आगे नहीं आते कि कोई दूसरा मदद कर देगा। ऐसी मानसिकता बदलने की जरूरत है।
नेक मददगारों को कानूनी संरक्षण
संतोष ने रेलकर्मियों को गुड समैरिटन यानी नेक मददगारों के अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल की स्वेच्छा से सहायता करने वाले को कानून के तहत संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134ए का उल्लेख करते हुए कहा कि नेक मददगारों को अनावश्यक परेशानी से बचाने के लिए प्रावधान किए गए हैं। सहायता करने वाले को सामान्यतः व्यक्तिगत जानकारी देने या गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। वह स्वेच्छा से गवाही देने का विकल्प चुन सकता है और लागू नियमों के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी गवाही दे सकता है। उन्होंने बताया कि घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले नेक मददगार पर इलाज का खर्च उठाने या अस्पताल की औपचारिकताएं पूरी करने की जिम्मेदारी नहीं होती।आपातकालीन स्थिति में अस्पताल को लागू नियमों के अनुसार आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले नेक मददगारों को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित राहवीर योजना की जानकारी दी गई। कहा गया कि योजना के तहत पात्र नेक मददगारों को प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र दिए जाने का प्रावधान है। साथ ही, सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार से संबंधित सरकारी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि पात्र मामलों में निर्धारित शर्तों के अनुसार उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने रेलकर्मियों को गोल्डन ऑवर के महत्व को समझाते हुए बताया कि दुर्घटना के बाद घायल को शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है। प्राथमिक उपचार, ट्राइएज यानी घायलों की स्थिति के अनुसार प्राथमिकता तय करना और एम्बुलेंस सेवा के समन्वय से अधिक प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य किया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने सीपीआर, प्राथमिक चिकित्सा, बैंडेज लगाने, फ्रैक्चर की स्थिति में प्रभावित अंग को सहारा देकर स्थिर करने तथा फायर एक्सटिंग्विशर के सही इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। रेलकर्मियों को मॉक ड्रिल के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और सुरक्षित कार्रवाई करने के तरीके भी सिखाए गए। कार्यक्रम में रेलवे के विभिन्न विभागो यथा कैरेज एंड वैगन, इंजीनियरिंग, ऑपरेटिंग, कमर्शियल और लोको शेड के कुल 70 रेलकर्मियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान एमडीडीटीआई के प्रिंसिपल ने विभिन्न विषयों पर लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए रेल सिविल डिफेंस टीम की सराहना की तथा टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य रेलकर्मियों को सड़क दुर्घटना जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में सजग, प्रशिक्षित और जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना रहा, ताकि समय पर सहायता देकर अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।
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