अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले की तैयारियों पर बदले मौसम ने ग्रहण लगा दिया है। पिछले 48 घंटों से जारी तूफानी हवा और बारिश ने मेला क्षेत्र में युद्ध स्तर पर चल रहे कार्यों की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है।
हालांकि बारिश और तूफान बहुत भयंकर नहीं है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और कीचड़ ने प्रशासन और दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम की इस बेरुखी से भव्य मेले की तैयारियों पर भारी असर पर रहा है। सामान्य दिनों में जहां मजदूरों की भीड़, हथौड़ों की गड़गड़ाहट और टेंट लगाने की गहमागहमी दिखती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। मेला क्षेत्र में एक भी मजदूर काम करता नहीं दिखा।
लगातार बारिश के कारण मुख्य मेला परिसर, थियेटर एरिया और कृषि विभाग के प्रांगण के कई हिस्सों में सूखी मिट्टी गीली हो गई है और जगह-जगह जल जमाव हो गया है। थियेटर एरिया, जो सांस्कृतिक और लोक-मनोरंजन का प्रमुख केंद्र है, उसके प्रांगण में पानी भर गया है। किसानों और आगंतुकों के लिए सजने वाले कृषि प्रदर्शनी प्रांगण में चल रही तैयारी पर भी विराम लग गया है। पर्यटकों के मुख्य आकर्षण केंद्र पर्यटन विभाग के मुख्य पंडाल, जहां मेले के उद्घाटन के साथ प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, वहां भी तैयारी पर ब्रेक लग गया है। आर्ट एंड क्राफ्ट ग्राम परिसर में निर्माणाधीन दुकानों पर भी इस बारिश का असर पड़ा है।
प्रशासनिक सख्ती और समय-सीमा की चुनौती
जानकारी के अनुसार इस वर्ष सारण जिला के हद में हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला ऐतिहासिक रूप से आगामी 22 नवंबर से 23 दिसंबर तक यानी पूरे 32 दिनों तक आयोजित होने जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पर्यटन विभाग तथा जिला प्रशासन ने इस बार व्यवस्थाओं को लेकर अनूठी पहल की है।

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उद्घाटन के दिन तक कोई काम अधूरा न रहे, जिसके लिए सरकारी मेले का टेंडर एक महीना पहले ही कर दिया गया था। प्रशासन का लक्ष्य है कि उद्घाटन के बाद सरकारी प्रदर्शनियों और पंडालों में निर्माण कार्य जारी न रहे, बल्कि उद्घाटन के समय सब कुछ चाक-चौबंद मिले। लेकिन अचानक आए इस बरसाती तूफान ने प्रशासनिक टाइमलाइन के गणित को बिगाड़ दिया है।
मौसम के इस बदले मिजाज से ठेकेदारों और आयोजकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि मेला शुरू होने में अब बहुत कम समय शेष है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ और मैदान का पानी नहीं सूखा, तो समय पर सभी संरचनाओं को खड़ा करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल स्थानीय रहिवासी और प्रशासनिक अधिकारी मौसम सुधरने और धूप खिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि रुके हुए कार्यों को दोगुनी रफ्तार से पुनः शुरू किया जा सके।
![]()













Leave a Reply