रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड के बोकारो में डाक टिकट सिर्फ चिट्ठी भेजने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए देश-दुनिया के इतिहास, सभ्यता और संस्कृति को भी जाना जा सकता है।
इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत 12 अक्टूबर को बोकारो के डीएवी पब्लिक स्कूल सेक्टर-4 में डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें बच्चों को अलग-अलग देशों के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला।
प्रदर्शनी में डाक टिकट संग्रहकर्ताओं ने विभिन्न देशों के डाक टिकट, मिनिएचर शीट और कई दुर्लभ टिकटों को प्रदर्शित किया। बच्चों ने उत्सुकता के साथ टिकटों को देखा और उनसे जुड़ी जानकारियां हासिल की। इस दौरान उन्हें पता चला कि छोटे-से डाक टिकट में भी किसी देश की ऐतिहासिक घटनाओं, महान शख्सियतों और सांस्कृतिक पहचान की झलक मिलती है।
डाक टिकट संग्रहकर्ता सतीश कुमार ने बताया कि वह पिछले 20-25 वर्षों से टिकटों का संग्रह कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह केवल शौक नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों की सभ्यता और इतिहास को जानने का अच्छा माध्यम है। वहीं, सितेश कुमार ने बताया कि उन्हें चार वर्ष की उम्र से ही डाक टिकट जमा करने का शौक है। धीरे-धीरे यह शौक जुनून बन गया और आज उनके पास लाखों रुपये मूल्य के डाक टिकटों का संग्रह है।
एक अन्य संग्रहकर्ता प्रभात रंजन ने बताया कि वे डाक टिकटों के अलावा पुराने सिक्के और अखबार भी जमा करते हैं। इनसे बीते समय की घटनाओं और सामाजिक बदलावों को समझने में मदद मिलती है। आयोजित प्रदर्शनी ने बच्चों में नई चीजें जानने, इतिहास को समझने और संग्रह करने की रुचि बढ़ाई।
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