अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड क्षेत्र में गंगा-गंडक का उफान भले ही अब धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ की विभीषिका अब भी कम नहीं हुई है। दोनों नदियां अब भी खतरे के निशान पर हैं।
प्रखंड की 18 पंचायतों के रहिवासी एक तरफ बाढ़ के पानी से तो दूसरी तरफ 12 पंचायतों के रहिवासी बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं। निचले दियरा इलाके के रहिवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पर रहा है। वहीं, प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावितों की समस्याओं के निदान के अलावा स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हर संभव मदद का प्रयास की जा रही है। ऊंचे स्थानों पर शरण लिए प्रभावितों को निःशुल्क भोजन, तिरपाल, चूड़ा-मीठा उपलब्ध कराया जा रहा है।
बताया जाता है कि जैतिया फीडर से संचालित हो रहे इलाकों में विद्युत आपूर्ति बंद होने से प्रभावित क्षेत्र के रहिवासियों को मोबाइल रिचार्ज, पेयजल और विद्युत उपकरणों के उपयोग में परेशानी हो रही है। इस संबंध में सोनपुर के कनीय विद्युत अभियंता शंभु कुमार ने 8 सितंबर को बताया कि जैतिया फीडर से संचालित विद्युत आपूर्ति विगत 5 दिनों से बंद रहने के कारण रहिवासियों की परेशानी बढ़ी है।
आमजनों को सूचित किया जाता है कि समस्याओं के निदान के लिए प्रतिदिन रात्रि 9 बजे से सुबह 5 बजे तक जैतिया फीडर से विद्युत आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि आमजनों की सावधानी जरूरी है, क्योंकि जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में विद्युत तार पानी के जस्ट ऊपर है, जिससे खतरा बना हुआ है।
जेई ने कहा कि सभी बाढ़ प्रभावितों को सूचित किया जाता है कि रात्रि 8 बजे से सुबह 5 बजे तक प्रतिदिन नाव का परिचालन व आवागमन न करें। किसी भी प्रकार की इमरजेंसी होने पर जैतिया फीडर कंट्रोल रूम- 9264440854, सबलपुर- 7763815489 या विद्युत विभाग के कर्मियों से संपर्क कर विद्युत आपूर्ति बंद कराकर कुछ मिनट के लिए अपना आपात कार्य कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पानी में आवागमन पर प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से सुबह 5 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी घटना न हो। आदेश की अवहेलना करने पर होने वाली क्षति की जिम्मेदारी स्वयं रहिवासियों की होगी। बता दें कि सोनपुर प्रखंड के निचले इलाकों में पानी स्थानीय रहिवासियों की जिंदगी पर भारी पर रहा है। हरिहरनाथ-जेपी सेतु के बजरंग चौक से निचली सड़क व सबलपुर, चारों पंचायत, नजरमीरा, पहलेजा, शाहपुर दियरा, भरपुरा, गंगाजल, दुधैला, जहाँगीरपुर, खरिका तक कई सड़कें पानी में डूबी हैं। घरों, खेतों में पानी घुसने और जल जमाव के बाद सैकड़ों परिवार मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों, बांधों, स्कूलों और टेंटों में शरण लिए हैं।
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