हरिहर क्षेत्र भक्ति और मुक्ति की पुण्य भूमि-कथा मर्मज्ञ कन्हैयाजी महाराज
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित श्रीराधा कृष्ण मंदिर के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस 8 सितंबर को भक्ति रस की अविरल धारा बही।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वृन्दावन धाम से पधारे प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ, भागवत रत्न आचार्य श्रीसुमन्त कृष्ण शास्त्री (कन्हैयाजी) महाराज ने कहा कि इस घोर कलिकाल में श्रीमद् भागवत महापुराण ही भगवान की प्राप्ति का सबसे सुंदर, सरल और सुलभ साधन है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत मनोरंजन का विषय नहीं, आत्मरंजन का विषय है। यह ग्रंथ जीव को आत्मा से परमात्मा की ओर ले जाता है।
अपने दिव्य प्रवचन में उन्होंने कहा कि सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं और असत्य से बड़ा कोई अधर्म नहीं। सभी जीवों से परस्पर सद्भाव रखना ही सच्चा प्रेम है, और सत्य का ही दूसरा नाम प्रेम है। भगवान की भक्ति ही सनातन संस्कृति में ऊर्जा और चेतना का संचार करती है।
द्वितीय दिवस की कथा में उन्होंने भागवत महापुराण की दिव्य उत्पत्ति, शुकदेवजी महाराज और राजा परीक्षित के जन्म का अलौकिक प्रसंग, परम विदुषी माता कुंती द्वारा की गई स्तुति तथा परम भक्त भीष्म पितामह द्वारा की गई भीष्म स्तुति का भावपूर्ण वर्णन किया। हरिहर क्षेत्र की महिमा का बखान करते हुए महाराजश्री ने कहा कि यह सिद्ध भूमि भक्ति और मुक्ति दोनों को लुटाने वाली है। जहां एक ओर पतित पावनी गंगा और नारायणी का संगम है, वहीं दूसरी ओर भगवान श्रीहरि और बाबा हर अर्थात् हरिहर नाथ का समन्वय विग्रह स्थापित है। यह पावन तीर्थ प्रयागराज से किसी भी प्रकार कम नहीं है।
उन्होंने कहा कि धन्य हैं सोनपुर वासी, जिन्हें ऐसी पुण्य भूमि पर जन्म लेने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
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