एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। बीते दिनों हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित शुद्धिकरण हवन-यज्ञ एवं गंगाजल छिड़काव मामले को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक 10 सितंबर को झारखंड की राजधानी रांची स्थित अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) थाना पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर जीरो एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
जानकारी देते प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अनुसूचित जाति के नेता की जातिगत पहचान अथवा उपस्थिति के कारण सार्वजनिक स्थल को अपवित्र मानकर उसका शुद्धिकरण कराया गया, तो यह महज राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि जातिगत अपमान, भेदभाव और सामाजिक समानता के संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न है। उन्होंने अपने आवेदन में एससी/एसटी (प्रीवेंशन ऑफ अट्रोसिटीज) एक्ट-1989, प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट-1955 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही बीते माह 8 से 10 अगस्त की सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, फोटो, सोशल मीडिया सामग्री तथा कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेजों को तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है। नायक ने कहा कि सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर एक दलित नेता की मौजूदगी के बाद सार्वजनिक स्थल का कथित शुद्धिकरण किया गया? यदि यह जातिगत सोच का परिणाम था, तो इसकी निष्पक्ष कानूनी जांच जरूरी है। संविधान में अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि घटना उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई है, इसलिए रांची में प्राप्त शिकायत को जीरो एफआई आर के रूप में दर्ज कर संबंधित पुलिस थाना, हल्द्वानी को भेजा जा सकता है। उन्होंने पुलिस से मामले में उपलब्ध सभी डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा दोषी पाए जाने वाले के विरुद्ध कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की।
नायक ने अनुसूचित जाति/जनजाति थाना प्रभारी से मांग की कि उनके द्वारा दिए गए आवेदन पर तत्काल जीरो एफआईआर दर्ज कर संबंधित थाना क्षेत्र को प्रेषित किया जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा घटना के लिए जिम्मेदार के विरुद्ध एससी/एसटी कानून सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के सम्मान का प्रश्न नहीं है, बल्कि दलित सम्मान, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा का सवाल है।
नायक ने स्पष्ट कहा कि जाति के नाम पर अपमान और भेदभाव की मानसिकता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संविधान ने सभी देशवासियों को समान सम्मान और अधिकार दिया है। संविधान और दलित सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रहेगी।
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