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सेवाती घाटी में इको टूरिज्म विकसित करने की पहल तेज, डीसी के नेतृत्व में पहुंची टीम

पिरगुल में मॉडल हाट बनाने की योजना; छह महीने में धरातल पर उतारने की योजना

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बीते दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सेवाती घाटी दौरे तथा निर्देश के बाद सेवाती घाटी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। इसे लेकर 22 अक्टूबर को बोकारो के उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा के नेतृत्व में जिला प्रशासन की टीम कसमार प्रखंड स्थित सेवाती घाटी पहुंची।

टीम में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार, अंचल अधिकारी (सीओ) नरेंद्र कुमार सिंह, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) नम्रता जोशी तथा वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने घाटी का निरीक्षण कर इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन की संभावनाओं का जायजा लिया। इसके बाद जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ बैठक कर विकास की रूपरेखा पर चर्चा की गई।

टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान सेवाती घाटी को पर्यावरण संरक्षण के साथ इको टूरिज्म के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। डीसी अजय नाथ झा ने कहा कि घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले छह महीने के भीतर विकास योजनाएं धरातल पर उतरने लगेंगी। योजनाओं का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय रहिवासियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।

मौके पर डीडीसी ने कहा कि सेवाती घाटी के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर योजनाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है। सड़क, आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय रोजगार को ध्यान में रखते हुए विकास प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे, ताकि पर्यटन गतिविधियों का लाभ आसपास के गांवों तक पहुंच सके। सीओ ने कहा कि पर्यटन स्थल के विकास के लिए क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखना जरूरी है। विकास योजनाओं को आगे बढ़ाते समय संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने पर ध्यान दिया जाएगा। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा होगी और क्षेत्र के विकास को गति मिल सकेगी।

बीडीओ ने कहा कि सेवाती घाटी के विकास में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से ग्रामीणों, महिलाओं और छोटे कारोबारियों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने वाली योजनाएं क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में सहायक होंगी।

ज्ञात हो कि निर्माणाधीन कसमार-बरलंगा मुख्य पथ से सेवाती घाटी की दूरी करीब ढाई किलोमीटर है। घाटी तक पर्यटकों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पिरगुल चौक से चौड़ी संपर्क सड़क बनाने की जरूरत पर चर्चा हुई। बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटकों को आवागमन में सुविधा होगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से पिरगुल में मॉडल हाट विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित हाट में स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार हस्तशिल्प और पारंपरिक सामग्रियों की खरीद-बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि सेवाती घाटी के विकास में वन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। निर्माण कार्यों में पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने तथा जहां संभव हो, सीमेंट आधारित निर्माण के बजाय लकड़ी के उपयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी चर्चा हुई। संबंधित विभागों को विकास प्रस्ताव तैयार कर आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

वन बचाव समिति के केंद्रीय अध्यक्ष विष्णुचरण महतो ने कहा कि सेवाती घाटी प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है और इसे इको टूरिज्म के रूप में विकसित करने से क्षेत्र को नई पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पर्यटन से होने वाले आर्थिक लाभ का फायदा आसपास के रहिवासियों को मिले। साथ ही जंगल और पर्यावरण को सुरक्षित रखने पर भी ध्यान देना जरूरी है। मुखिया सरिता देवी ने कहा कि सेवाती घाटी तक बेहतर सड़क संपर्क और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास आवश्यक है।

इससे क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है और ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने पिरगुल में मॉडल हाट बनाने की योजना को भी स्थानीय कारीगरों और कारोबारियों के लिए उपयोगी बताया।
पंचायत समिति सदस्य हेमंती देवी ने कहा कि सेवाती घाटी के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से स्थानीय रहिवासियों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान उपरोक्त के अलावा बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के कसमार प्रखंड अध्यक्ष दिलीप कुमार हेंब्रम, गंगाधर महतो, उमेश कुमार जायसवाल, सुरेंद्र महतो, महेंद्र नाथ महतो, मनोज कुमार महतो, रुपेश महतो, सुनील महतो, राजेश्वर महतो, सिद्धेश्वर प्रजापति, विभा कुमारी सहित अन्य ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे।

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