रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो सिटी कॉलेज में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई पर विराम लगने से विद्यार्थियों की चिंता बढ़ गई है। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) धनबाद की ओर से नए सत्र में कॉलेज के पीजी पाठ्यक्रमों में नामांकन नहीं लेने के फैसले का छात्र नेताओं और विद्यार्थियों ने विरोध किया है।
इस संबंध में विद्यार्थियों ने 3 नवंबर को कॉलेज के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर निर्णय पर पुनर्विचार करने और पीजी में नामांकन दोबारा शुरू कराने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि बोकारो सिटी कॉलेज में पीजी की पढ़ाई बंद होने से जिले के हजारों विद्यार्थियों के सामने आगे की शिक्षा जारी रखने की चुनौती खड़ी हो जाएगी। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए धनबाद या रांची जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं होगा। इससे कई विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बोकारो सिटी कॉलेज में अब तक इतिहास और गणित विषय में ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई कराई जा रही थी। उपरोक्त दोनों विषयों में भी नए सत्र के लिए नामांकन नहीं होने से कॉलेज में पीजी की पढ़ाई का अवसर फिलहाल समाप्त हो गया है। विश्वविद्यालय की ओर से शिक्षकों की कमी को नामांकन बंद करने की वजह बताया जा रहा है। हालांकि, विद्यार्थियों का कहना है कि कॉलेज में अब भी कुछ शिक्षक पीजी की कक्षाएं लेते रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए नियुक्ति की जानी चाहिए, न कि पाठ्यक्रम का संचालन ही बंद कर दिया जाए।
चास कॉलेज छात्र संघ के पूर्व सचिव युगदेव महथा ने बताया कि वर्ष 2018 में भी बोकारो में पीजी की पढ़ाई जारी रखने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय बोकारो सिटी कॉलेज के मुख्य द्वार पर आमरण अनशन किया गया था। पूर्व मंत्री समरेश सिंह के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। उस दौरान भरोसा दिया गया था कि बोकारो में पीजी की पढ़ाई बंद नहीं होगी। अब नए सत्र में नामांकन बंद होने की सूचना से विद्यार्थियों में असंतोष है। उनका कहना है कि वर्षों के प्रयास के बाद मिली उच्च शिक्षा की सुविधा को समाप्त करना विद्यार्थियों के हित में नहीं है।
स्थानीय एक छात्रा ने बताया कि उनके पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे रोजाना बोकारो से करीब 45 किलोमीटर दूर धनबाद जाकर पीजी की पढ़ाई का खर्च उठा सके। यदि कॉलेज में ही पढ़ाई जारी रहती है, तभी उनके लिए आगे की शिक्षा प्राप्त करना संभव होगा। दूसरे शहर में जाकर पढ़ाई करना उनके परिवार के लिए आर्थिक रूप से मुश्किल है।
छात्र पिंटू राजा ने बताया कि वर्ष 2018 से कॉलेज में पीजी की पढ़ाई संचालित हो रही थी। नए सत्र में नामांकन की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अब दूसरे जिलों का रुख करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन के इस फैसले से करीब ढाई से तीन हजार विद्यार्थियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
छात्र नेताओं ने बीबीएमकेयू प्रबंधन और राज्य सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कहा कि शिक्षकों की कमी का समाधान नियुक्ति और संसाधनों की व्यवस्था कर किया जाना चाहिए। बोकारो जैसे बड़े जिले में पीजी की पढ़ाई का स्थानीय विकल्प बनाए रखना जरूरी है। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो अलग बोकारो विश्वविद्यालय के गठन की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा के लिए बोकारो के विद्यार्थियों को दूसरे जिलों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
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