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सबलपुर नया बाजार में विजयादशमी पर भव्य सांस्कृतिक जागरण संपन्न

भाव-नृत्य पर मंत्रमुग्ध हुए दर्शक, तालियों से किया स्वागत

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। विजयादशमी के पवित्र अवसर पर बीते 20 अक्टूबर को सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर नया बाजार स्थित दुर्गा पूजा के सांस्कृतिक मंच पर ‘डी’ डांस ग्रुप के बैनर तले आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक जागरण कार्यक्रम ने दर्शकों को भक्ति-भाव से ओतप्रोत कर दिया।

इस भव्य आयोजन का प्रमुख उद्देश्य भारतीय सनातन संस्कृति, कला और युवा प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम का कुशल संचालन डी डांस ग्रुप के संचालक दीपक कुमार के संरक्षण में किया गया।छात्र-छात्राओं द्वारा माता दुर्गा और विभिन्न देवी-देवताओं के जीवंत स्वरूपों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इनमें सत्यम राज (भगवान शिव), शिवम कुमार (गणेशजी), सुप्रिया (माँ काली) और माही (राधा) की मनमोहक भूमिकाओं ने दर्शकों से भरपूर सराहना बटोरी।

वहीं अमित ने श्रीकृष्ण के रूप को अत्यंत खूबसूरती से निभाया। अंकुश, आशीष, सुभाष और अंशु द्वारा प्रस्तुत अघोरी बाबा की जीवंत भूमिका ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। यानू और खुशी के भाव-नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं अंकित कुमार द्वारा राक्षस के रूप में किया गया जीवंत अभिनय भी बेहद सराहनीय रहा।

प्रेरणास्रोत एवं आयोजक: सुधीर कुमार का सराहनीय विजन

एक कदम…उन्नति की ओर के मूलमंत्र को चरितार्थ करते हुए, सबलपुर नया टोला रहिवासी सुधीर कुमार गुप्ता विगत 11 वर्षों से लगातार इस पावन परंपरा को निभा रहे हैं। वर्तमान में रेलवे में अपनी सेवाएं दे रहे सुधीर अपने पैतृक गांव सबलपुर में अपनी सभ्यता, संस्कृति और प्राचीन धरोहरों के संरक्षण व संवर्धन के लिए निरंतर समर्पित हैं। उनके इस अनूठे प्रयास का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को नृत्य, अभिनय और लोक संगीत के माध्यम से अपनी जड़ों से जोड़ना है।

यह सांस्कृतिक मंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह बिहार, झारखंड, मिथिला और बंगाल आदि क्षेत्रों की प्राचीन पारंपरिक लोक-संस्कृति और कला का जीवंत दस्तावेज बन चुका है। नवरात्र के पावन पर्व और भारतीय संस्कृति को एक सूत्र में पिरोकर समाज को नई दिशा देने वाली यह पहल आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है। दुर्गा पूजा के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को युवा प्रतिभाओं से परिचित कराने, कला को प्रोत्साहित करने तथा कलाकारों को पारितोषिक व पुरस्कार देकर सम्मानित करने की यह परंपरा सुधीर द्वारा समाज में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। स्वच्छ, शुद्ध और सकारात्मक विचारों से ही एक स्वस्थ एवं सुसंस्कृत समाज की परिकल्पना की जा सकती है।

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