रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिले में दिव्यांग महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, समान अवसर एवं सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने तथा उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से सहयोगिनी संस्था के द्वारा 25 अगस्त को जिला के हद में बहादुरपुर स्थित सहयोगिनी कार्यालय में दिव्यांग महिलाओं के अधिकार विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जानकारी के अनुसार कार्यशाला की शुरुआत प्रतिभागियों के परिचय एवं कार्यक्रम के उद्देश्य की जानकारी के साथ की गयी। इस अवसर पर दिव्यांग महिलाओं के अधिकारों, उनके सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों तथा अधिकारों तक उनकी पहुंच को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन शशि भूषण पांडेय ने दिव्यांग महिलाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दिव्यांग महिलाओं को भी अन्य देशवासियों की तरह सम्मानपूर्वक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, रोजगार एवं आजीविका के अवसर पाने और सार्वजनिक सेवाओं तक समान पहुंच का अधिकार है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने अधिकारों को जानने और किसी भी प्रकार के भेदभाव या अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में आवाज उठाने का आह्वान किया।
रिसोर्स पर्सन चंचला कुमारी ने समान अवसर, सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता के विषय पर प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग महिलाओं को केवल सहानुभूति की नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और निर्णय लेने की स्वतंत्रता की आवश्यकता है। शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़ाव के माध्यम से उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांग महिलाओं को परिवार और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए। पंचायत और स्थानीय स्तर की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाना भी समावेशी समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान जागरूकता, संवाद और सशक्तिकरण पर भी विशेष चर्चा की गयी। प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए बताया गया कि अधिकारों की जानकारी तभी सार्थक है, जब महिलाएं अपनी बात रखने, निर्णय लेने और उपलब्ध सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम हों। इस दौरान प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और दिव्यांग महिलाओं के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम में सहयोगिनी संस्था की सचिव कल्याणी सागर ने कहा कि, दिव्यांग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा केवल एक कार्यक्रम तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। दिव्यांग महिलाओं को दया और सहानुभूति के बजाय समान अधिकार, सम्मान, अवसर और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। कहा गया कि जब महिलाएं अपने अधिकारों को समझेंगी और अपनी आवाज को मजबूत करेंगी, तभी वास्तविक सशक्तिकरण संभव होगा।
उन्होंने कहा कि सहयोगिनी संस्था का प्रयास है कि समुदाय की महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी मिले और वे शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा एवं सरकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कहा कि दिव्यांग महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए परिवार, समुदाय, पंचायत, सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा।
कार्यशाला में यह भी चर्चा की गई कि दिव्यांग महिलाओं के प्रति समाज की सोच में बदलाव लाना जरूरी है। उन्हें कमजोर या आश्रित समझने के बजाय समान अधिकार वाली नागरिक और समाज की सक्रिय भागीदार के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। आर्थिक आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और सामाजिक भागीदारी उनके सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण आधार हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने दिव्यांग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, समान अवसर सुनिश्चित करने, भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने तथा उन्हें सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए सहयोग करने का संकल्प लिया। संस्था के निदेशक गौतम सागर ने कहा कि दिव्यांग महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता और सामुदायिक संवाद की प्रक्रिया आगे भी जारी रखी जाएगी, ताकि वे अपने अधिकारों को समझकर समाज में बराबरी के साथ अपनी भूमिका निभा सकें।
मौके पर चंचला कुमारी, शशि भूषण पांडेय, कल्याणी सागर, संजय कुमार दास, गौतम सागर, प्रकाश कुमार महतो, रवि कुमार राय, कुमारी किरण, मंजू देवी, लावनी घोष, नीतू कुमारी, अभय कुमार सिंह, शोभा रानी, हीरालाल, कौशल्या देवी, नईमुद्दीन राय, सोनिया बीबी, हेमंती देवी, शबनम प्रवीण, सुरेखा कुमारी, पुष्पा कुमारी, अमोल कुमारी, कुसुम देवी, कौशल्या कुमारी, नीतू कुमारी, बसंती देवी, रश्मि कुमारी, ज्योतिया देवी, अमला कुमारी, उषा देवी, सुलेमनी देवी, मुनिया कुमारी, सुरज देवी, सीमा देवी, निशा कुमारी, राखी कुमारी, उषा कुमारी, रत्ना, धनमय देवी, मदन कुमारी, दिपाली देवी, बेबी कुमारी, सुनीता देवी, शशिकला देवी, बेला देवी आदि उपस्थित थी।
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