एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी सुधारों और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर चल रहे आंदोलन के बाद रांची और हजारीबाग में 950 छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने, पुलिस कार्रवाई और आंदोलन से जुड़े एक्स अकाउंट की जानकारी मांगे जाने पर एआईएसएफ रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने झारखंड सरकार की कड़ी आलोचना की है।
जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 23 अगस्त को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि झारखंड सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय एफआईआर, लाठीचार्ज और अब सोशल मीडिया अकाउंट की जांच के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों की मांगें गलत है तो सरकार संवाद और तथ्यों के जरिए उनका जवाब देने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सहारा क्यों ले रही है? क्या अब सरकार से सवाल पूछना भी अपराध है? क्या जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग करने वाले युवाओं को एफआईआर के डर से चुप कराया जाएगा?
एहतेशाम के अनुसार एक्स अकाउंट@JPSCreformanch से जुड़े IP एड्रेस, लॉगिन-लॉगआउट रिकॉर्ड और डिवाइस संबंधी जानकारी इक्कठा कर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार छात्रों को टारगेट कर रही है। छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है। कहा कि क्या सरकार छात्रों के आंदोलन से डर गयी है, इसलिए छात्रों के सवालों का जवाब साइबर जांच और एफआईआर के जरिये कर रही है?
उन्होंने कहा कि एआईएसएफ झारखंड सरकार से मांग करता है कि प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को परेशान न किया जाए और जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मुद्दों पर छात्र संगठनों के साथ तत्काल बातचीत शुरू की जाए। एहतेशाम परवीन ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को पुलिस की लाठी और मुकदमों से दबाया नहीं जा सकता। सरकार को दमन का रास्ता छोड़कर संवाद और समाधान का रास्ता अपनाना होगा।
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