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करम महोत्सव को लेकर कसमार में महिलाओं का नृत्य प्रशिक्षण

बारिश की फुहार भी नहीं रोक सकी करम नृत्य की थिरकन

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित कोड़ाडीह में आगामी 20 सितंबर को प्रस्तावित करम परबतिया जड़ुआहि (करम महोत्सव) को लेकर बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में बीते 11 सितंबर को प्रखंड के हद में खैराचातर में करम नृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

बताया जाता है कि भारी बारिश की फुहार के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां देर शाम तक प्रशिक्षण में जुटी रहीं। पारंपरिक करम नृत्य की विभिन्न गतिविधियों का अभ्यास करते हुए महिलाओं ने आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।

आदिवासी कुड़मी समाज, झारखंड, बंगाल एवं ओडिशा की ओर से प्रस्तावित इस महोत्सव को लेकर गांव-गांव संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार 20 सितंबर को झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में रहिवासी कोड़ाडीह पहुंचेंगे। आयोजन में पांच लाख से अधिक की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही करम महोत्सव को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का प्रयास किए जाने की बात कही गई है।

करम महोत्सव कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक अजीत प्रसाद महतो ने समाज से 20 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में कोड़ाडीह पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि करम महोत्सव के माध्यम से कुड़मी-कुड़मालि समाज की संस्कृति, पहचान और अधिकार से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर सामने लाने की तैयारी है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों ने कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी है। कुड़मी समाज के हक, अधिकार और पहचान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। झारखंड में इस विषय पर सरकार की भूमिका पर समाज की नजर है। उन्होंने कहा कि कुड़मी-कुड़मालि आंदोलन पहले भी चलता रहा है और आगे भी जारी रहेगा।

झारखंड प्रदेश संरक्षक दीपक पुनरिआर ने कहा कि करम परब कुड़मी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पहचान से जुड़ा है। ऐसे आयोजन समाज की संस्कृति, परंपरा और विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं। उन्होंने 20 सितंबर को कोड़ाडीह पहुंचकर महोत्सव को सफल बनाने की अपील की। कहा कि भारी बारिश के बावजूद महिलाओं और युवतियों की जिस तरह भागीदारी रही, वह समाज की एकजुटता और अपनी संस्कृति के प्रति गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं युवतियों को करम नृत्य की विभिन्न गतिविधियों का अभ्यास कराया गया। बारिश के बीच भी पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का अभ्यास देर शाम तक चलता रहा। आयोजकों ने बताया कि कोड़ाडीह में होने वाले महोत्सव को व्यापक रूप देने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार प्रशिक्षण और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में मुख्य संरक्षक अजीत प्रसाद महतो, झारखंड प्रदेश संरक्षक दीपक पुनरिआर, प्रदेश उपाध्यक्ष सह जिला प्रभारी अनंत कंड़हरआर, कवि शिल्पी लालजी महतो, गोबिंद महतो, पार्वती महतो, ममता महतो, जितनी महतो, संजय कुमार महतो, जगदीश महतो, बिंदेश्वर महतो, दुर्गाचरण महतो, मानुदेव गुलिआर, सुकदेव राम, भुनेश्वर महतो, सुभाष महतो, परमेश्वर महतो, विनोद महतो, प्रयाग महतो एवं अखिलेश्वर महतो समेत कुड़मालि भाखि चारि आखड़ा कसमार के सभी सदस्यगण मौजूद थे।

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