Advertisement

समाजसेवी व भाजपा नेता लालबाबू पटेल का निधन, नारायणी तट पर अंतिम संस्कार

 प्रहरी संवाददाता/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर बभन टोली रहिवासी भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं समाजसेवी लालबाबू पटेल की लम्बी बीमारी के कारण इलाज के क्रम में मौत हो गई। वे पिछले कई महीनों से गंभीर अस्वस्थता से जूझ रहे थे।

जानकारी के अनुसार बिहार की राजधानी पटना और देश की राजधानी दिल्ली के बड़े अस्पतालों में चले लंबे उपचार के बाद, अंततः पटना के एक चिकित्सालय में उन्होंने बीते 27 जून को अपनी अंतिम सांसे ली।​

कहते हैं कि विपत्ति और बीमारी की कठिन परीक्षा में भी उनका आत्मबल डगमगाया नहीं, किंतु ईश्वर की इच्छा के आगे हर सांसारिक प्रयास थम जाता है। 28 जून को सोनपुर के पावन काली घाट पर, जीवन-दायिनी और मोक्ष-दायिनी नारायणी (गंडक) नदी के तट पर उनकी पार्थिव देह पंचतत्त्व में विलीन हो गई।

​शोक की इस बेला में मां नारायणी का तट चहुंओर दु:खद वातावरण। दिवंगत लालबाबू के ज्येष्ठ पुत्र, देश की रक्षा में तैनात सीआरपीएफ जवान रौशन कुमार ने अश्रुपूर्ण नयनों से अपने पूज्य पिता को मुखाग्नि दी। पिता के जाने का गम तो गहरा था, पर भारत माता के सपूत के चेहरे पर पिता के दिए संस्कारों की चमक भी साफ़ दिख रही थी। इस अत्यंत भावुक क्षण में मृतक के दूसरे और छोटे पुत्र रोहित कुमार सहित पूरा परिवार गहरे शोक में डूबा हुआ था।

​इस अंतिम विदाई के साक्षी बनने और पुण्यात्मा को नमन करने के लिए सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के मुखिया दिनेश राय, संजय शर्मा, अरविंद सिंह (अधिवक्ता), अटल शर्मा, शिवम शर्मा, मनोज श्रीवास्तव, धर्मेंद्र राय, वार्ड सदस्य राहुल श्रीवास्तव, शैलेश शर्मा, कन्हाई श्रीवास्तव, सर्वेश शर्मा, अजय शर्मा, सकलदीप पटेल सहित भारी संख्या में ग्रामीण और आसपास के प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। सभी की आँखें नम थीं और हर दिल में लालबाबू के साथ बिताए पल जीवंत हो रहे थे।

धर्म के प्रति अगाध निष्ठा: ‘मठ-मंदिरों के स्वैच्छिक मीडिया प्रभारी’

दिवंगत ​लालबाबू पटेल केवल एक राजनेता या समाजसेवी नहीं थे; वे सनातन संस्कृति के सच्चे प्रहरी थे। धर्म के प्रति उनकी अटूट आसक्ति और गहरी निष्ठा ने उन्हें सोनपुर और सबलपुर के जन-जन के हृदय में स्थापित कर दिया था।
​सोनपुर, सबलपुर और राहर दियारा नजरमीरा पंचायतों में जब भी कोई धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ या कीर्तन होता, लालबाबू का एक अलग ही रूप देखने को मिलता था। प्रभु के कार्यों का प्रचार-प्रसार करना और उन धार्मिक आयोजनों की गूंज को मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना उनका जुनून बन चुका था। उनके इसी नि:स्वार्थ और धर्मपरायण स्वभाव को देखकर रहिवासियों ने प्यार और हँसी-मजाक में उन्हें एक अनूठी उपाधि दे दी थी सभी मठ-मंदिरों के स्वैच्छिक मीडिया प्रभारी।

रहिवासी उन्हें परिहास में जो भी कहें, लेकिन उन्होंने इस लोक-लाज से ऊपर उठकर कभी भी अपने कर्म पथ का दामन नहीं छोड़ा। वे हर मंदिर की चौखट और प्रभु के हर कार्य को अपना सर्वस्व मानते रहे। दिवंगत का चले जाना सोनपुर अंचल के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने राजनीति को समाज नीति और समाजसेवा को धर्म नीति बनाकर जिया।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता उपेन्द्र सिंह, सोनपुर भाजपा दक्षिणी मंडल अध्यक्ष दीपक शर्मा, सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के सरपंच दिलीप सिंह, युवा समाजसेवी अनुपम कुमार चंदन, सोनपुर भाजपा के वरिष्ठ नेता धनंजय सिंह आदि ने श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि आज वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन नारायणी के तट पर उठती लहरें और सबलपुर के मंदिरों की घंटियां उनके नि:स्वार्थ सेवा भाव की गवाही देती रहेंगी।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *