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श्रद्धा की लहरों के बीच मनाया गया मां गंगा का पुनर्जन्म उत्सव

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर सहित उत्तर बिहार के विभिन्न गंगा तटों पर 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पावन पर्व भक्तिमय वातावरण में मनाया गया।

वैशाख शुक्ल सप्तमी के इस पुण्य अवसर पर पहलेजा धाम स्थित माता गंगा मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने पतित पावनि गंगा में पवित्र डुबकी लगाकर माता का पूजन-अर्चन किया और लोक-कल्याण की कामना की।

​स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने सोनपुर के सुप्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर, वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के बाबा पतालेश्वर नाथ और अन्य शिवालयों में जलाभिषेक किया। पहलेजा घाट से जल लेकर भक्तों ने हर-हर महादेव और जय गंगे के उद्घोष के साथ शिवलिंग पर अर्पण किया।

गंगा जन्मोत्सव के अवसर पर हाजीपुर के कौनहारा घाट और सबलपुर के तटों पर भी अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा।​ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा सप्तमी मां गंगा के पुनर्जन्म का दिन है। जब गंगा के वेग से जह्नु ऋषि का आश्रम जलमग्न हो गया, तब वे क्रोधवश गंगा को पी गए थे। भगीरथ की प्रार्थना पर ऋषि ने उन्हें अपने कान से मुक्त किया, जिससे वे जाह्नवी कहलाईं।

​जहां गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास में उनके स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है, वहीं सप्तमी तिथि उनके पुनर्जन्म और ऋषि कन्या के रूप में स्वीकार्य होने का उत्सव है। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता धनंजय सिंह ने कहा कि गंगा केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में मोक्ष और अगाध प्रेम की वाहिका हैं। आज का दिन उनके अनादि और नित्य स्वरूप के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है।
​इस वर्ष 23 अप्रैल को उदया तिथि के अनुसार श्रद्धालुओं ने शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ कर अपनी आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया। गंगा की स्वच्छता और निर्मलता का संकल्प ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता है।

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