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बर्ड-फ्लू से भयाक्रांत होने वाले पक्षी व्यवसायियों को चिकित्सक की सलाह

स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान कांके के निदेशक डॉक्टर बिपिन का संदेश
अजीत जायसवाल/पेटरवार(बोकारो)। बर्ड-फ्लू महामारी की खबर से भयाक्रांत व परेशान होने वाले पक्षी व्यवसायियों तथा इसके सेवन करने वालों के लिए स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, कांके, रांची के निदेशक डॉक्टर बिपिन महथा (Director of Ranchi Doctor Bipin Mahatha) द्वारा जारी किये गए एक ऑडियो संदेश में इससे संबंधित खास और अति महत्वपूर्ण जानकारियां दी गयी है।
संदेश में चिकित्सक डॉ महथा ने कहा है कि राज्य के चाईबासा एवं दुमका में कई किस्म के जंगली पक्षी मृत पाये गये हैं। जैसे कौवा, मैना, तोता आदि। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से अबतक 2510 नमूने जांच के लिये कोलकाता स्थित आईडीडीएल संस्था को भेजे गये है। जिसमे किसी में बिमारी की पुष्टि नही पाया है। उन्होंने कहा है कि इसे बर्ड-फ्लू तो नही, मनुष्यों की तरह इन्फ्लूएंजा कह सकते हैं। डॉ महथा ने यह खुलासा किया कि इस तरह किसी पालतू पक्षी जैसे मुर्गा, बत्तख, कबूतर आदि में इस तरह के इन्फ्लूएंजा के लक्षण मिले तो घबड़ाने की कोई बात नही। यहां के इलाके में 70 डिग्री तापमान में इनके मांस पकाए जाते हैं। जिससे सारा वायरस नष्ट हो जाता है। उन्होंने राज्य के पक्षी पालको को सलाह दिया कि इन्हें काटने व धोने के दौरान सावधानी अवश्य बरतनी चाहिए। यह आह्वान भी किया कि यदि पक्षियों में अचानक पंख फैलाना, आंख से पानी गिरना, गर्दन पीछे घूमना, पतला दस्त, अंडे पिलपीले होना आदि कोई भी लक्षण दिखे तो जिला या प्रखंड पशु-चिकित्सक के माध्यम से तुरंत ईलाज कराएं तथा किसी भी मृत पक्षी को सुरक्षित प्लास्टिक में पैक करके आईडीडीएल कोलकाता में जांच के लिये भेजा जा सकता है। इसके लिये राज्य हेल्पलाइन सेंटर से 9835152390 में संपर्क कर सकते हैं।ऐसे राज्य के 24 जिलों में कुल 525 पशु-चिकित्सक कार्यरत हैं। जिसमें पेटरवार प्रखंड के पक्षी चिकित्सक डा0 धर्मरक्षित विद्यार्थी से संपर्क कर सकते हैं।

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