अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र के श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में चल रहे पंच दिवसीय श्रावणी झूला महोत्सव का 28 अगस्त को पारंपरिक विधि-विधान के साथ रात्रि में समापन किया गया। इस अवसर पर श्रावणी उपाकर्म मनाया गया।
शास्त्रों में आज के दिन यज्ञोपवीत पूजन, सप्तऋषियों के आवाहन और दशविध स्नान का विशेष वर्णन है। समापन के अवसर पर श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणचार्यजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि हमारे शास्त्रों में षोडश संस्कार बताए गए हैं। इसमें सर्वप्रथम गर्भाधान संस्कार है। कहा कि जीव जिस दिन गर्भ में प्रवेश करे, उसे गर्भाधान संस्कार कहा गया है। उसके बाद पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, कर्णवेध, विद्यारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त, समावर्तन, विवाह और अन्त्येष्टि – यही सोलह प्रकार के संस्कार हैं।
संस्कारो वै यज्ञः अर्थात संस्कार ही यज्ञ है। उन्होंने कहा कि आजकल हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं, जिसका दुष्परिणाम हमारे सामने है। कहा कि संस्कार सत्संग और प्रवचन श्रवण से प्राप्त होता है। झूला महोत्सव में आए समस्त श्रद्धालुओं को स्वामीजी ने महोत्सव की सफलता पर साधुवाद दिया और पुनः आगामी 4 सितम्बर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आने के लिए सभी भक्तों को निमंत्रण दिया।
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