एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। कांग्रेस द्वारा लोकतांत्रिक विरोध से घबराई भाजपा अब देश में अघोषित आपातकाल थोपने की साजिश कर रही है। रेल-मेट्रो रोककर जनता को बंधक बनाना लोकतंत्र नहीं, सत्ता के अहंकार और तानाशाही मानसिकता का प्रमाण है।
देश की राजधानी दिल्ली में लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन को रोकने के नाम पर राजधानी को लगभग ठप करने, मेट्रो और रेल सेवाओं को बाधित करने तथा आम जनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार और प्रशासन के रवैये पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने तीखा हमला बोला है।
उन्होंने 10 अक्टूबर को झारखंड की राजधानी रांची में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार ने भाजपा सरकार के उस चेहरे को बेनकाब कर दिया है, जो हर विरोध की आवाज को दबाने के लिए सत्ता और प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल करना चाहती है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि दिल्ली उसकी जागीर नहीं है और देश की जनता उसकी प्रजा नहीं है। राजधानी में प्रदर्शन हुआ तो सरकार ने जनता की आवाज सुनने के बजाय दिल्ली की सड़कों, रेल और मेट्रो व्यवस्था को प्रभावित करने का रास्ता चुना। इससे प्रदर्शनकारी कम और आम रहिवासी ज्यादा परेशान हुए। उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन से निपटने का रास्ता शहर को बंद करना नहीं, संवाद करना है। सरकार यदि अपने ही देशवासियों की आवाज से इतनी भयभीत हो जाए कि रेल और सार्वजनिक परिवहन तक रोकने लगे, यह लोकतांत्रिक सरकार की कमजोरी का प्रमाण है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार को याद रखना चाहिए कि संविधान ने उसे जनता पर शासन करने का अधिकार नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने की जिम्मेदारी दी है। संविधान में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को दिया गया है। सरकार का काम उस अधिकार की रक्षा करना है, उसे कुचलना नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति में लोकतंत्र की जगह डर, दबाव और दमन ने ले ली है। विपक्ष प्रदर्शन करे तो बैरिकेड, किसान आवाज उठाएं तो रोक, छात्र सवाल पूछें तो कार्रवाई और आमजन अपना अधिकार मांगे तो प्रतिबंध। आखिर भाजपा किस लोकतंत्र की बात करती है?
नायक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भाजपा सरकार के लिए आईना है। सत्ता के अहंकार में सरकार यह भूल गई है कि सार्वजनिक परिवहन किसी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं है। दिल्ली की मेट्रो, रेलवे और सड़कें करोड़ों आम जनों की जीवन रेखा है। इन्हें राजनीतिक विरोध दबाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को जनता से माफी मांगनी चाहिए कि राजनीतिक असहमति को नियंत्रित करने के लिए आम देशवासियों को क्यों परेशान किया गया। सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए इतनी व्यापक पाबंदियां लगाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे जितने बैरिकेड लगा ले, आमजन की आवाज को बैरिकेड से नहीं रोका जा सकता। रेल रोकने से सवाल नहीं रुकेंगे, मेट्रो बंद करने से विरोध नहीं रुकेगा और दिल्ली को घेरने से लोकतंत्र की आवाज दबने वाली नहीं है। कहा कि भाजपा को सत्ता का अहंकार छोड़कर संविधान की किताब खोलनी चाहिए। देश में सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकार स्थायी हैं।
नायक ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली को बंद कर भाजपा लोकतंत्र को कैद नहीं कर सकती। रेल रोककर आमजनों की आवाज नहीं रोक सकती। बैरिकेड लगाकर संविधान के अधिकार नहीं छीन सकती। देशवासी सब देख रहे है और लोकतंत्र इसका जवाब जरूर देगा। उन्होंने मांग की कि दिल्ली में लगाए गए अनावश्यक प्रतिबंधों की तत्काल समीक्षा की जाए, आम देशवासियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाए तथा लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों के साथ दमन के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाए।
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