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मुजफ्फरपुर में मुशायरा-सह-कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन

एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। मुजफ्फरपुर रहिवासी सिबगतुल्लाह हमीदी के आवास हमीदी कॉम्प्लेक्स में 4 अक्टूबर को डाॅ अंसारी ‘आसी’ अदबी साहित्यिक संगम के तत्वावधान में मुशायरा-सह-कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

सम्मेलन की अध्यक्षता स्थानीय कवियित्री एवं शायरा सविता राज तथा मंच संचालन श्रवण कुमार ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत सिबगतुल्लाह हमीदी ने अपने पिता डाॅ अंसारी साहब की ग़ज़ल प्रस्तुत कर की।

कार्यक्रम में अली अहमद मंज़र ने दूर जाओ न आदमियत से आईने टूटते हैं नफ़रत से, तुम हो मजबूर अपनी आदत से
घर भी ख़ाली है ख़ैरो बरकत से की प्रस्तुती दी। वहीं अध्यक्षता कर रही कवियित्री सविता राज ने गमों में कब, कहां, कोई यहां दामन बढ़ाता है, जरा सा मुस्कराने पर जमाना रूठ जाता है। डॉ मो. सिगवतुल्लाह हमीदी ने दिल की दुरी को मिटाया जाये, घर को जन्नत सा बनाया जाये।

आलम सिद्दीकी ने निगाहें उसकी नेदामत से झुक गयी आलम, उसे मुआफ न करते तो और क्या करते। श्रवण कुमार ने दिलों में मुहब्बत को बोना पड़ेगा, हमें खुद हीं आइना होना पड़ेगा। चांदनी समर ने जिंदगी फिर हर चीज अता करती है, मेरी माँ जब मेरे हक में दुआ करती है पेश कर जमकर बाहवाही ली।

कार्यक्रम में शायर अली अहमद ‘मंजर’, एमल हासमी, आलम सिद्दीकी तथा शायराओं सविता राज, चाँदनी समर एवं मुस्कान केसरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को साहित्यिक रंग प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में सिबगतुल्लाह हमीदी ने सभी अतिथियों, शायरों एवं कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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