एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। भाजपा झारखंड में 18 साल के शासन के बाद भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था क्यों नहीं बना पाई? बाहर इलाज कराने वाले मरीजों के लिए झारखंड में स्वास्थ्य आश्रय बनाए राज्य के हेमंत सरकार।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 17 अक्टूबर को भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में लंबे समय तक शासन करने के बावजूद भाजपा ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की चुनौती का समाधान नहीं कर सकी, जिससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर मरीजों की निर्भरता कम हो।
उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धियों और कमियों की समीक्षा होनी चाहिए, ताकि आमजनों को पता चले कि गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए। कहा कि झारखंड के गरीब, आदिवासी, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार कैंसर, हृदय रोग, किडनी सहित गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए वेल्लोर, चेन्नई, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों में जाते हैं। इलाज के खर्च के साथ आवास, भोजन और परिवहन का बोझ उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य के हेमंत सोरेन सरकार को पिछली सरकार की कमियों पर सवाल उठाने के साथ वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था में ठोस सुधार भी सुनिश्चित करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक जांच सुविधाओं को मजबूत करने के साथ बाहर इलाज कराने वाले मरीजों की समस्याओं का समाधान भी स्वास्थ्य नीति का हिस्सा होना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि सरकार से उनकी प्रमुख मांग है कि वेल्लोर, चेन्नई, दिल्ली और कोलकाता में जरूरत के आधार पर झारखंड स्वास्थ्य आश्रय स्थापित किए जाएं। गरीब मरीजों और उनके परिजनों को निःशुल्क या रियायती दर पर सुरक्षित आवास एवं सस्ती भोजन सुविधा दी जाए। तत्काल राहत के लिए सरकारी अतिथि गृहों या किराये के भवनों का उपयोग किया जाए। मरीजों के लिए हेल्पलाइन और सहायता केंद्र शुरू किए जाए। राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बजट सहित समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
नायक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफ़ान अंसारी से इस दिशा में तत्काल पहल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल की स्वास्थ्य संबंधी कमियों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और वर्तमान सरकार को भी अपने कार्यों से साबित करना चाहिए कि गरीबों का स्वास्थ्य उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यदि झारखंड में वेल्लोर जैसी चिकित्सा सुविधाएं तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकती, तो कम से कम बाहर इलाज कराने जाने वाले मरीजों को रहने के लिए लॉज और हॉस्टल की व्यवस्था सरकार करे। बीमारी से जूझ रहे परिवारों को इलाज के साथ छत की चिंता में भी नहीं छोड़ना चाहिए।
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