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पांच परगना फाइटर्स केंद्रीय अध्यक्ष ने की तमाड़ को बांटकर नया प्रखंड बनाने की मांग

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। मात्र 23 पंचायत, 144 गांव और 1.54 लाख से अधिक आबादी, फिर भी एक ही प्रखंड पर निर्भर हैं झारखंड की राजधानी रांची से टाटा मार्ग पर स्थित तमाड़ के रहिवासी। नए प्रखंड के गठन की मांग को लेकर पांच परगना फाइटर्स के केंद्रीय अध्यक्ष ललित कुम महतो ने 6 अक्टूबर को कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के रहिवासियों को दूर प्रखंड कार्यालय जाने से परेशानी हो रही है।

ज्ञात हो कि, तमाड़ प्रखंड को दो हिस्सों में बांटकर नया प्रखंड गठित करने की मांग एक बार फिर उठी है। पांच परगना फाइटर्स के केंद्रीय अध्यक्ष ललित कुमार महतो ने सरकार और जिला प्रशासन से तमाड़ के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। महतो ने कहा कि तमाड़ में 23 पंचायत, 144 गांव और 1.54 लाख से अधिक की आबादी है। प्रखंड का क्षेत्रफल भी 613 वर्ग किलोमीटर से अधिक है। इतने बड़े क्षेत्र के बावजूद पूरा तमाड़ एक ही प्रखंड कार्यालय पर निर्भर है। इसका सीधा असर ग्रामीणों को मिलने वाली प्रशासनिक सुविधाओं पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को आय, जाति, आवास और अन्य प्रमाण-पत्र बनवाने, पेंशन से जुड़े काम, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, राजस्व संबंधी कार्य, दाखिल-खारिज और प्रखंड स्तर के दूसरे कामों के लिए प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले रहिवासियों को कई बार एक काम के लिए एक से अधिक बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।

पांच परगना फाइटर्स केंद्रीय अध्यक्ष ललित कुमार महतो के अनुसार प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीणों का पूरा दिन आने-जाने में निकल जाता है और किराया तथा अन्य खर्च भी बढ़ जाता है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए दूर स्थित कार्यालय तक पहुंचना अधिक परेशानी वाला होता है। किसी आवेदन में कागज की कमी रह जाने या अधिकारी के उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें दोबारा उसी दूरी को तय करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यालय आमजन के जितना नजदीक होंगे, सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेना उतना ही आसान होगा। नए प्रखंड के गठन से ग्रामीणों को प्रमाण-पत्र, पेंशन, राजस्व, कल्याणकारी योजनाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

महतो ने तमाड़ की स्थिति की तुलना बुंडू से करते हुए कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बुंडू में 11 पंचायत और 88 गांव हैं, जबकि तमाड़ में 23 पंचायत और 144 गांव है। कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बुंडू नगर पंचायत सहित उसकी आबादी 82,975 थी। वहीं तमाड़ की आबादी 1.54 लाख से अधिक है। कहा कि मुद्दा केवल नए प्रखंड के गठन का नहीं, बल्कि ग्रामीणों को प्रशासनिक सुविधाएं उनके घर के करीब उपलब्ध कराने का है।

झारखंड सरकार को तमाड़ के पुनर्गठन के लिए प्रशासनिक और भौगोलिक सर्वेक्षण कराकर नए प्रखंड के गठन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा जाए और मामले में समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि तमाड़ के ग्रामीणों को अपने छोटे-बड़े प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

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