अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में आध्यात्मिक नगरी हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् में 24 अगस्त को श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर पंचदिवसीय श्रावणी झूला महोत्सव का पारम्परिक विधि-विधान से शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर महोत्सव का प्रारंभ भगवान श्रीगजेन्द्र, श्रीबालाजी और माता पद्मावती के चक्रधारा, पद्मधारा एवं सहस्त्रधाराओं द्वारा दिव्य औषधियों तथा दिव्य रस-रसायनों से महाभिषेक के साथ किया गया। महाभिषेक के उपरांत भगवान का दिव्य अलौकिक श्रृंगार एवं नवीन वस्त्र धारण कराया गया। वैदिक विद्वानों द्वारा जय-विजय तथा भगवान श्रीविष्वक्सेन का पूजन कर भगवान श्रीतिरुपति बालाजी, श्रीदेवी और भूदेवी को झूले पर पधराकर षोडशोपचार पूजन एवं अर्चना की गई। तदोपरांत हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने विधिवत झूले की डोर पकड़कर झूला महोत्सव का शुभारंभ किया।
इस पावन अवसर पर दिलीप झा, नंद किशोर तिवारी, भोला सिंह, फूल झा, शिव कुमार झा, श्रीलाल पाठक, लाला सिंह, गौरव झा, गोपाल शास्त्री, शंभू झा सहित सोनपुर, हाजीपुर (वैशाली), मुजफ्फरपुर एवं बिहार की राजधानी पटना के अनेक श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया।
भगवान के दर्शन मात्र से होता मनोकामनों की पूर्ति-स्वामी लक्ष्मणाचार्य
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पीठाधीश्वर स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज ने कहा कि शास्त्रों में वर्णित है कि आज पुत्रदा एकादशी पर जो भक्त भगवान का डोला का दर्शन करता है और श्रद्धा से झूला झुलाता है, उसके पुत्र आज्ञाकारी होते हैं। जिन दंपतियों को संतान नहीं है, उन्हें भगवत् कृपा से संतान प्राप्ति होती है और पुत्र सुपुत्र होता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रानुसार पुत्र के तीन लक्षण हैं – माता-पिता के जीवित रहते उनकी आज्ञा का पालन करना, उनकी क्षय तिथि पर ब्राह्मण भोजन कराना और गयाजी में पिंडदान करना। यदि इनमें से एक भी कर्तव्य का पालन न हो तो वह पुत्र मल-मूत्र के समान माना जाता है।
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