तमिलनाडु के वेल्लोर से विशेष/एस. पी. सक्सेना। देश की महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड की अनुशंगी कंपनी सेंट्रल कोलफील्डस लिमिटेड तथा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नाल्को में निदेशक के पद पर कार्य कर चुके आर. एस. महापात्रा धुन के इतने पक्के हैं कि निर्धारित नियम से किसी प्रकार का समझौता नहीं करते हैं। चाहे उन्हें अपना पद हीं क्यों न छोड़ना पड़े। उनका सोंच सादा जीवन और उच्च विचार पर आधारित है।
बीते दिनों अपनी छोटी बहन का इलाज कराने तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित सीएमसी अस्पताल पहुंचे सीसीएल व् नाल्को के पूर्व निदेशक महापात्रा ने भेंट में बताया कि उनकी छोटी बहन 60 वर्षिया अहिल्या कुमारी देवी का सीएमसी में इलाज चल रहा है। कहा कि एम्स भुवनेश्वर में इलाज के बाद उन्हें यहां लेकर आये हैं।
महापात्रा ने 18 अक्टूबर को विशेष भेंट में कहा कि उनका जन्म 11 नवंबर 1964 को ओडिसा राज्य के गंजाम जिला के हद में बुगुडा में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक से उच्च शिक्षा ब्रह्मपुर (आशिका) से प्राप्त करने के बाद ब्रह्मपुर विश्वविद्यालय से एमए तथा औद्योगिक संबंध श्रमिक कल्याण विषय से डिग्री हासिल की।
उन्होंने बताया कि उन्हें पहली नौकरी 23 अप्रैल 1989 में जम्मू कश्मीर के बगलिहार स्थित पनबिजली परियोजना में बतौर कार्मिक अधिकारी मिली, जहां वे 12 वर्षो तक सेवा दी। इसके बाद उन्हें जम्मू के सलाल जल विद्युत पावर स्टेशन में उप प्रबंधक कल्याण के तौर पर कार्य करने का मौका मिला। इसके बाद वे वर्ष 2000 से 2003 तक लोकटेक पावर स्टेशन में कार्मिक प्रबंधक के पद पर कार्य किया। वहां से हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के चमेरा स्थित पावर स्टेशन में 31 मार्च 2008 तक उप महाप्रबंधक, इसके बाद नई दिल्ली में इंजिनियर्स इंडिया लिमिटेड में सहायक महाप्रबंधक सेवा दी।
अपने कार्य तथा श्रमिक कल्याण को सर्वोपरि माननेवाले धुन के पक्के आरएस महापात्रा ने बताया कि 17 जून 2011 में उनका चयन कोल इंडिया लिमिटेड में महाप्रबंधक कार्मिक के पद पर किया गया। तत्पश्चात वे सीसीएल मुख्यालय रांची में कार्य शुरु किया। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए 8 जून 2015 को उन्हें सीसीएल का निदेशक कार्मिक बनाया गया।
उन्होंने बताया कि इस दौरान कई श्रमिक नेता उनकी कार्यप्रणाली को लेकर खफा रहने लगे, क्योंकि वे श्रमिक कल्याण को तरजीह देते थे। जबकि कथित श्रमिक नेता मामले में अपने लाभ के चक्कर में रहते थे। बताया कि इसे लेकर तथाकथित (नाम उजागर नहीं करने) एक श्रमिक नेता द्वारा सीएमडी से उनकी शिकायत को लेकर उनका सीएमडी से विवाद हो गया। बताया कि 31 दिसंबर 2019 को उनका चयन निदेशक मानव संसाधन के पद पर नाल्को भुवनेश्वर (ओडिसा) में हो गया। उन्होंने एक जनवरी 2020 को यहां कार्यभार संभाल लिया। जहां से वे अक्टूबर 2024 को सेवानिवृत हुए।
उन्होंने बताया कि झारखंड में कार्य के दौरान उन्हें बहुत अच्छा अनुभव मिला। खासकर बेरमो कोयलांचल के कई नेता जिसमें कांग्रेस के वर्तमान बेरमो विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनुप सिंह, भाजपा के रविंद्र कुमार पांडेय, धनबाद के पूर्व सांसद ददई दूबे, आरसीएमयू नेता श्यामल सरकार, दिवंगत महेंद्र विश्वकर्मा तथा कथारा के अजय कुमार सिंह से उनका खास लगाव रहा है। इसके अलावा वर्तमान में ओडिसा के राज्यपाल बने बृजमोहन राम, बड़का सयाल के एससी/एसटी, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ब्रज किशोर पासवान, श्रमिक नेता रामेश्वर सिंह फ़ौजी सहित दर्जनों अन्य की सोंच, व्यवहार तथा कार्यप्रणाली से वे प्रभावित रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उन्हें बिहारी संस्कृति, दक्षिण भारतीय भोजन तथा झारखंडी रहन-सहन काफी पसंद रहा है। इसके अलावा हिमाचली बोलचाल की भाषा, कश्मीर के रहिवासियों की साफगोई उन्हें काफी प्रभावित किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि कश्मीर में काम करने के कारण उन्हें अपनी शादी में काफी परेशानी हुई थी, बावजूद इसके वे अपने पिता (ओडिसा सरकार में बड़ा बाबू रहे) काशी विश्वनाथ महापात्रा को अपना आदर्श माना तथा उनके निर्णय को पत्थर की लकीर मानकर सिरोधार्य किया है। जिससे अबतक उन्हें जीवन में कभी भी धोखा नहीं मिला है।
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