निदेशक के इस्तीफे, कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही व् विद्यार्थियों की सुरक्षा की माँग
एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची में स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) में छात्र आदित्य की मौत को हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या बताया गया है। हालाँकि, इस घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों और कारणों का निष्पक्ष जाँच के माध्यम से सामने आना आवश्यक है। उक्त बाते एआईएसएफ रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 16 अक्टूबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।
उन्होंने कहा कि यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि महज़ आधे घंटे के भीतर परिस्थितियाँ इतनी बदल गईं कि आदित्य ने अपनी जान दे दी? क्या इस घटना को केवल परीक्षा के दबाव से जोड़कर देखा जा सकता है, या इसके पीछे अन्य परिस्थितियाँ भी थीं। इन सवालों के जवाब मिलना बेहद जरूरी है।
हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि आदित्य बेहद हँसमुख, मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव का छात्र था। घटना से लगभग दस दिन पहले ही सभी विद्यार्थियों ने मिलकर उसका जन्मदिन मनाया था। उसके साथियों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि आदित्य ऐसा कदम उठा सकता है। कहा कि बीते 8 अक्टूबर से मिड-सेमेस्टर परीक्षाएँ शुरू हुई थीं। विद्यार्थियों के अनुसार, पहले मिड-सेमेस्टर में कुल सात पेपर होने थे, लेकिन आदित्य केवल दो पेपर ही दे पाया था। 17 और 18 अक्टूबर को छुट्टी थी तथा अगला पेपर 19 अक्टूबर को निर्धारित था।
एहतेशाम के अनुसार विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि इससे पहले 16 अक्टूबर को लगभग चार से पाँच घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। बीते 10 अक्टूबर को भी बिजली नहीं थी, जिस दिन आदित्य की मौत हुई। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि आदित्य को संस्थान में आए अभी लगभग दो महीने ही हुए थे। घटना वाली रात उसने अपने पिता से भी बातचीत की थी। उसने बताया था कि उसकी परीक्षाएँ 16 अक्टूबर तक चलेंगी। उसने अगले दिन घर जाने के लिए ट्रेन का टिकट भी बुक कर लिया था।
ऐसे में सवाल उठता है कि पिता से बातचीत करने और घर जाने की तैयारी के कुछ ही समय बाद ऐसा क्या हुआ कि आदित्य की जान चली गई? कहा कि 12वीं की राज्य बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आदित्य ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए तीन वर्ष का समय दिया था। उसने भागलपुर स्थित आकाश इंस्टीट्यूट में दो वर्ष तक तैयारी की। इसके बाद उसने फिजिक्स वाला के माध्यम से एक वर्ष तक और पढ़ाई की। तीन वर्षों की मेहनत के बाद उसे ट्रिपल आईटी राँची में दाखिला मिला था।
एहतेशाम के अनुसार जिस छात्र ने अपने भविष्य के लिए तीन वर्षों तक संघर्ष किया, उसके बारे में यह मान लेना कि उसने केवल 30 अंकों के मिड-सेमेस्टर पेपर के कारण आत्महत्या कर ली, कई सवाल खड़े करता है। इस घटना के वास्तविक कारणों का पता निष्पक्ष जाँच के माध्यम से लगाया जाना चाहिए।
कहा गया कि एआईएसएफ की ओर से हम छात्र आदित्य की मौत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच कराने की माँग करते हैं। कहा गया कि हमारा स्पष्ट मानना है कि केवल निदेशक का पद छोड़ देना आदित्य के साथ न्याय नहीं होगा। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उसकी मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों और कारणों का पता लगाया जाए तथा यदि किसी की लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। हम माँग करते हैं कि मामले की निष्पक्ष जाँच हो, कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। आदित्य को न्याय मिलना चाहिए और उसकी मौत के पीछे का सच सामने आना चाहिए।
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