एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड में दुष्कर्म की अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 6.3 दर्ज की गई है। जबकि, राज्य में बलात्कार के कुल 1,221 मामले दर्ज किए गए है। राज्य में बढ़ते दुष्कर्म व् अपराध का ग्राफ बड़ी चिंता का कारण है।
उक्त बाते 16 अक्टूबर को ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) के रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने कही। उन्होंने कहा कि झारखंड में महिलाओं के साथ उत्पीड़न के मामले आखिर क्यों बढ़ते जा रहे हैं? जबकि, झारखंड सरकार की और से कई तरह की मुहिम चलाई गई। जिसमें सबसे अधिक चार्चित मईया सम्मान योजना रही। जिसने वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार को पुनः सत्ता की सीढ़ी को आसान कर दिया था। लेकिन आज फ़िर भी महिलाएं समाज में क्यों पिछड़ती जा रही है। ये चिंता अथवा चर्चा का विषय है।
एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम ने कहा कि सामाजिक दृष्टिकोण से अगर हम विचार करे तो पाएंगे कि आज भी सामाज में शिक्षा, रोज़गार की कमी ही इन आपराधिक गतिविधियों का मुख्य कारण है। आस पास के रहिवासी ना तो खुद को शिक्षित कर पा रहे हैं न हीं नई पीढ़ी को नयी विचारधारा के साथ चलने दे रहे हैं। जब तक आम रहिवासी अपना दृष्टिकोण महिलाओं के प्रति नहीं बदलेंगे, तब तक समाज में महिलाओं की आवाज़ दबती रहेगी। और ये बदलाव तभी संभव है जब आमजन अपना विचार बदलेंगे। ये विचार तब ही बदलेंगे जब उन्हें अपने आस पास घट रही घटनाओं का कारण पता चलेगा। उनके सोचने समझने की क्षमता में वृद्धि होगी। और ये सब तभी मुमकिन है जब आमजन बेहतर शिक्षा और रोज़गार से जुड़ेंगे।
एहतेशाम ने कहा कि हम सड़क में चाहे कितना भी नारे बाजी कर ले, समाज में बदलाव नहीं आने वाला। क्योंकि अपराध की जड़ अशिक्षा अथवा बेरोजगार है। आज चाहे सरकार हो या समाजसेवी, बेहतर शिक्षा और रोज़गार के आलावा वे सारे मुद्दे पर चर्चा कर रही है।
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