अफजल अनीस ने ग्रामीणों के दस्तावेज तैयार करने में की मदद
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में नावाडीह अंचल अंतर्गत नारायणपुर में 10 अक्टूबर को एसआईआर के तहत तार्किक विसंगति की श्रेणी में शामिल मतदाताओं की सहायता के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में नोटिस प्राप्त करने वाले ग्रामीण मतदाताओं को उनकी विसंगति के अनुसार आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं यूनाइटेड मिल्ली फोरम (यूएमएफ) के प्रदेश महासचिव अफजल अनीस ने ग्रामीणों के दस्तावेज तैयार करने में सराहनीय मदद की। उक्त शिविर में नारायणपुर पंचायत के पंचायत समिति सदस्य पति नेहरूल अंसारी, अंजुमन के सदर मोहम्मद फारूक अंसारी, एहसान अंसारी, प्रयाग महतो सहित अन्य ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे।
मौके पर स्थानीय प्रतिनिधियों ने एसआईआर को लेकर अफजल अनीस एवं उनके संगठन द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की सराहना की। कहा कि उनके गांव में एसआईआर को लेकर काफी डर और असमंजस का माहौल था। नोटिस मिलने के बाद ग्रामीण परेशान थे कि उन्हें आगे क्या करना है और कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे। ऐसे समय में अफजल अनीस ने केवल मार्गदर्शन ही नहीं किया, बल्कि गांव पहुंचकर ग्रामीणों के दस्तावेज तैयार करने में भी मदद की। इससे रहिवासियों की परेशानी कम हुई और उनमें भरोसा बढ़ा है।
इस बावत अफजल अनीस ने कहा कि कई मतदाताओं के नाम, पिता के नाम और उम्र संबंधी विवरण में अंतर होने के कारण उन्हें तार्किक विसंगति की श्रेणी में रखा गया है। इनमें दो भाई-बहनों की उम्र के बीच नौ महीने से कम का अंतर, छह भाई-बहनों की एक व्यक्ति से मैपिंग तथा उम्र में 15 वर्ष से कम या 40-50 वर्ष तक का अंतर जैसे मामले शामिल हैं। कहा कि ऐसे मामलों में मतदाताओं को अपनी पहचान और पारिवारिक विवरण साबित करने के लिए दस्तावेज जुटाने में काफी परेशानी हो रही है।
अनीस के अनुसार, कई मतदाताओं के पास आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे पहचान पत्र उपलब्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ मामलों में अंचल कार्यालय से निर्गत वंशावली, जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, मैट्रिक प्रमाण पत्र या जन्म प्रमाण पत्र मांगे जाने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मतदाताओं के विवरण का उचित सत्यापन किया जाना चाहिए। इससे वास्तविक मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने में मदद मिल सकती है। कहा कि ग्रामीण इलाकों में एसआईआर की प्रक्रिया और दस्तावेजों को लेकर अभी भी जागरूकता की कमी है।
ऐसे में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आगे आकर जरूरतमंद मतदाताओं की मदद करनी चाहिए, ताकि वे अपनी समस्या समझ सकें और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकें। उन्होंने कहा कि जागरूकता शिविरों का उद्देश्य मतदाताओं के बीच फैले डर और असमंजस को दूर करना तथा उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने सामाजिक संगठनों और जागरूक समाजसेवियों से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर मतदाताओं की सहायता करें, ताकि किसी पात्र मतदाता को जानकारी या दस्तावेज संबंधी परेशानी के कारण कठिनाई का सामना न करना पड़े।
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